पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव को चुनाव आयोग की तरफ से साफ निर्देश दिए गए हैं कि वो 17 फरवरी तक सभी लंबित निर्देशों का पालन करें। बता दें कि, राज्य में बीएलओ का बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिला है और नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए।
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव लगातार बनी हुई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को सख्त निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि वह 17 फरवरी (मंगलवार) शाम 5:30 बजे तक सभी लंबित आदेशों का पालन करें।
क्या हैं चुनाव आयोग के मुख्य निर्देश?
चुनाव आयोग से पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को साफ निर्देश दिए गए कि राज्य के बीएलओ का बढ़ा हुआ भुगतान जारी करें। दरअसल, चुनाव आयोग ने पिछले साल बूथ लेवल ऑफिसर्स का सालाना मानदेय ₹6,000 से बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया था। इसके साथ ही बीएलओ सुपरवाइजर का मानदेय ₹12,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया गया। लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक यह बढ़ी हुई रकम जारी नहीं की। इसी पर आयोग ने नाराजगी जताई है।
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नियम तोड़ने वाले अधिकारियों पर FIR
इसके साथ चुनाव आयोग ने कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) यानी मतदाता सूची की विशेष संशोधन प्रक्रिया के दौरान नियम तोड़ने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। चार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश पहले ही दिया गया था। राज्य सरकार ने उन्हें सस्पेंड तो किया, लेकिन एफआईआर अभी तक दर्ज नहीं हुई।
बैठक में क्या दी गई चेतावनी?
शुक्रवार को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को दिल्ली बुलाया था। इस बैठक में साफ कहा गया कि तय समय तक आदेश नहीं माने गए तो कड़ी कार्रवाई हो सकती है। बता दें कि, पश्चिम बंगाल में दो महीने के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए चुनाव आयोग चाहता है कि सभी तैयारियां समय पर पूरी हों।