पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को चुनाव आयोग (ECI) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आयोग 1987 से 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं से नागरिकता का प्रमाण मांगकर "पीछे के दरवाजे से एनआरसी" लागू करने की कोशिश कर रहा है। दीघा के तटीय शहर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसी कारण उन्होंने तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। ममता बनर्जी फिलहाल पुरबा मेदिनीपुर जिले में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारियों का जायजा लेने पहुंची हैं।
'घोषणापत्र में मांगे गए दस्तावेज '
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें चुनाव आयोग से दो लंबे पत्र मिले हैं, जिनमें 25-30 पेज की जानकारी है। "मैंने पूरी तरह से पढ़ा नहीं है, लेकिन एक नजर डालने पर पता चला कि आयोग 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं से एक घोषणापत्र (Annexure D) भरवाने को कह रहा है, जिसमें उनके माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र मांगे गए हैं।"
'यह एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक साजिश '
ममता बनर्जी ने सवाल उठाया, "इस कदम का मकसद क्या है? ये तो सीधी-सी बात है- एनआरसी को दरवाजे के पीछे से लाने की कोशिश। यह एनआरसी से भी अधिक खतरनाक लग रहा है और सभी विपक्षी दलों को इसका विरोध करना चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में इसका असर नहीं होगा क्योंकि वहां भाजपा की सरकार है और चुनाव भी करीब हैं। "इनका असली निशाना बंगाल है। वे यहां के प्रवासी मजदूरों, छात्रों, ग्रामीणों और अशिक्षित मतदाताओं को निशाना बना रहे हैं।"
'ईसीआई भाजपा का एजेंडा चला रहा है'
ममता ने चुनाव आयोग पर भाजपा का "हथियार" बनने का आरोप लगाया और पूछा कि क्या आयोग को राजनीतिक दलों से बिना चर्चा के ऐसे कदम उठाने का अधिकार है। "वे हमें बंधुआ मजदूर समझ रहे हैं। सब कुछ एक आरएसएस प्रचारक के इशारे पर हो रहा है जो आज देश चला रहा है," उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए कहा। मुख्यमंत्री ने जनता से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र पर हमला है और बीजेपी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।