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क्या बंगाल में बढ़ेगी SIR की अंतिम समय-सीमा?: SEC ने चुनाव आयोग से मांगे सात अतिरिक्त दिन; जानिए पूरा मामला

Sat, 07 Feb 2026 08:30 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने मतदाता सूची से जुड़ी सुनवाई और फॉर्म 6, 7, 8 की प्रक्रिया के लिए 14 फरवरी तक समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध चुनाव आयोग से किया है।

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मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर आम लोगों को राहत मिल सकती है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने भारत निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि मौजूदा समयसीमा को बढ़ाकर 14 फरवरी तक किया जाए।
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मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से यह अनुरोध सुनवाई प्रक्रिया, फॉर्म 6, 7 और 8 के जमा करने, दस्तावेज अपलोड और आवेदनों के निपटारे से जुड़ा है।
  • वर्तमान समयसीमा को देखते हुए उन्होंने एक सप्ताह के अतिरिक्त समय की मांग की है।
  • ताकि सभी पात्र मतदाताओं को अपनी जानकारी अपडेट करने का पूरा अवसर मिल सके।
  • निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, समय बढ़ने से मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सकेगी।
  • खासतौर पर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिनके दस्तावेज या आवेदन किसी कारणवश समय पर जमा नहीं हो पाए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, 'अनमैप्ड' श्रेणी में कुल 31,68,426 मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। इनमें से 50 हजार से कुछ अधिक यानी करीब 1.57 प्रतिशत मतदाता बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद पेश नहीं हुए। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) ने इन्हें अंतिम सूची से हटाए जाने योग्य माना है।

क्यों उठी समय बढ़ाने की जरूरत?
हाल के दिनों में राज्य के कई जिलों से शिकायतें सामने आई थीं कि
  • लोगों को समय पर नोटिस नहीं मिल पाया
  • दस्तावेज अपलोड करने में तकनीकी दिक्कतें आईं
  • कई जगहों पर सुनवाई केंद्रों पर भीड़ बढ़ गई
इसके चलते बड़ी संख्या में मतदाता तय समयसीमा में अपनी बात नहीं रख पाए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने चुनाव आयोग से एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है।
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राजनीतिक हलचल भी तेज
मतदाता सूची संशोधन को लेकर राज्य में सियासी तापमान भी बढ़ा हुआ है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाए हैं कि जीवित मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश हो रही है, जबकि सत्तारूढ़ दल का कहना है कि यह प्रक्रिया आम लोगों को परेशान कर रही है। 
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