सार
पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने टीएमसी के दोनों गुटों को पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है। अब दोनों गुटों को टीएमसी की पहचान से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरना होगा और इसका असर उपचुनाव पर कैसे पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
चुनाव आयोग से ममता और ऋतब्रत गुट को झटका
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद और बढ़ गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है।
क्या दोनों गुट अब टीएमसी के नाम और चिह्न से चुनाव लड़ सकेंगे?
आयोग के आदेश के मुताबिक, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत गुट के अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट में से किसी को भी फिलहाल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम का अकेले इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। दोनों गुट फूल और घास चुनाव चिह्न का भी इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह चुनाव चिह्न ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के लिए आरक्षित है। यानी आगामी उपचुनाव में दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।
दोनों गुटों को अब क्या विकल्प दिए?
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अपना अलग-अलग नाम चुनने का विकल्प दिया है। वे चाहें तो अपने संगठन के नाम में मूल पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने का उल्लेख भी कर सकते हैं। इसके साथ दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। इसके लिए वे उपचुनाव के लिए आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में से अपनी पसंद का चिह्न चुन सकेंगे।
18 सितंबर तक क्या करना होगा?
आयोग ने दोनों गुटों को अपने पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न बताने के लिए 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक का समय दिया है। प्रत्येक गुट को नाम के तीन विकल्प प्राथमिकता के क्रम में देने होंगे। इसी तरह तीन मुक्त चुनाव चिह्न भी प्राथमिकता के क्रम में बताने होंगे। इसके बाद आयोग प्रत्येक गुट के लिए एक नाम को मंजूरी देगा और एक चुनाव चिह्न आवंटित करेगा।
यह अंतरिम फैसला क्यों लिया गया?
आयोग ने कहा है कि संगठनात्मक विवाद पर चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत अंतिम फैसला करने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। लेकिन आगामी उपचुनावों को देखते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से जुड़ा विवाद तत्काल व्यवस्था की मांग करता है। इसलिए आयोग ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चिह्न के साथ चुनाव लड़ने का निर्देश दिया है। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक आयोग इस विवाद पर अंतिम फैसला नहीं कर देता।