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टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर घमासान: चुनाव आयोग से मिले ऋतब्रत बनर्जी, बताया क्यों अटका मामला?

Thu, 17 Sep 2026 04:01 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले दो गुट आमने-सामने हैं। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है और अंतिम दस्तावेज भी मांगे हैं। नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले यह विवाद और अहम हो गया है। ऋतब्रत गुट चुनाव आयोग भी पहुंच गया है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि ऋतब्रत ने मिलने के बाद क्या कुछ कहा...

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ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के दो गुटों के बीच चल रहा विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट आज चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखने पहुंचा। आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग समय पर सुनवाई के लिए बुलाया है। ऋतब्रत गुट चुनाव आयोग से मिल चुका है। मिलने के बाद ऋतब्रत बोले कि हम आज चुनाव आयोग से मिले।

चुनाव आयोग से मिलने के बाद क्या बोले ऋतब्रत?

हमने अपनी दलीलें रखीं और रेजिनगर और नंदीग्राम में उपचुनावों के बारे में उठाए गए सवालों का जवाब दिया। कल इन उपचुनावों के लिए नॉमिनेशन फाइल करने की डेडलाइन थी, और आज स्क्रूटनी हुई, इसलिए सिंबल अलॉटमेंट का मामला अभी अटका है। हमने फॉर्म ए और बी जमा कर दिए हैं। हालांकि, फॉर्म ए और बी कालीघाट से भी जमा किए गए हैं, इसलिए चुनाव आयोग को आखिरी फैसला लेना चाहिए।

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आगे उन्होंने कहा कि हम तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। फॉर्म ए जमा कर दिया है। अब प्रतिक्रिया चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के पास है। शायद आयोग से सलाह लेने के बाद फैसला लेंगे। चुनाव आयोग सबसे बड़ी बॉडी है। हमें उस पर भरोसा करना चाहिए। हम पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में काम करते हैं, इसलिए हमें चुनाव आयोग पर भरोसा करना होगा।

ऋतब्रत गुट में कौन-कौन नेता शामिल हैं?

ऋतब्रत के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप राय, चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखरुज्जमान और वकील अमन झा शामिल हैं। ऋतब्रत ने कहा है कि चुनाव आयोग की ओर से मांगी गई जानकारी और सुनवाई की तारीखों को लेकर पहले कुछ गलतफहमी हुई थी। उनके मुताबिक 16 सितंबर को पहले से कोई बैठक तय नहीं थी। उन्होंने बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार 16 सितंबर को अंतिम दस्तावेज जमा किए गए थे।

ममता बनर्जी गुट की ओर से कौन रखेगा पक्ष?

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से कल्याण बनर्जी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वह लोकसभा सदस्य होने के साथ वकील भी हैं। इस गुट के बाकी चार प्रतिनिधियों के नाम  फिलहाल स्पष्ट नहीं किए गए हैं। दोनों गुट खुद को असली टीएमसी और पार्टी के वैध प्रतिनिधि के तौर पर पेश कर रहे हैं। 

विवाद की शुरुआत कैसे हुई और कितने विधायक ऋतब्रत के साथ हैं?

  • विधानसभा चुनाव में भाजपा से हार के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के करीब 80 नवनिर्वाचित विधायकों में से लगभग 60 विधायक ममता बनर्जी से अलग हो गए।
  • इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के दावे सामने आए। दोनों पक्षों ने चुनाव आयोग से मान्यता की मांग की है। इस विवाद के बीच नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं। 
  • इन सीटों पर मतदान छह अक्टूबर को होना है और मतगणना नौ अक्टूबर को होगी। ऐसे में चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर आयोग का फैसला दोनों गुटों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

चुनाव आयोग के फैसले के बाद क्या हो सकता है?

  • इस विवाद पर आयोग के फैसले के बाद मामला खत्म होने की गारंटी नहीं है। एक राजनीतिक पर्यवेक्षक के हवाले से कहा गया है कि किसी भी गुट को फैसला अपने खिलाफ लगता है तो वह सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है। 
  • संभावनाओं में किसी एक गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न देना, फिलहाल स्थिति बरकरार रखना या नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करना शामिल बताया गया है। 
  • यदि नाम और चिह्न फ्रीज होता है तो दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न अपनाना पड़ सकता है। इस विवाद के बीच चुनाव आयोग की गुरुवार की सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर है।
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