पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का समर्थन करते हुए उन्हें पद्म भूषण देने की बात कही। उन्होंने बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान और मतदाता सूची से कथित घुसपैठियों के नाम हटाने को लेकर भी दावा किया। ज्ञानेश कुमार को लेकर और क्या बोले? आइए, जानते हैं...
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की तारीफ करते हुए उन्हें कम से कम पद्म भूषण दिए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने लंबे समय बाद ऐसा चुनाव देखा, जिसमें लोगों को बिना डर के मतदान करने का मौका मिला। समिक भट्टाचार्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि कांग्रेस पार्टी भी राहुल गांधी की बातों पर ध्यान नहीं देती और उन्हें गंभीरता से नहीं लेती।
विज्ञापन
'ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण मिलना चाहिए'
भट्टाचार्य ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान लोगों को भयमुक्त माहौल देने की दिशा में काम किया। उनके अनुसार, राज्य के लोगों ने लंबे समय बाद ऐसा चुनाव देखा, जिसमें मतदान के दौरान डर और दबाव की स्थिति नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान हत्या जैसी घटनाएं नहीं हुईं और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की अनुमति मिली। हालांकि, ये दावे भाजपा नेता के राजनीतिक बयान हैं और इन पर विपक्ष की ओर से अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं।
मतदाता सूची को लेकर भी किया दावा
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल एक सीमावर्ती राज्य है और यहां मतदाता सूची को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने मतदाता सूची से बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम हटाने की पहल की। भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने शायद ही लंबे समय बाद ऐसा चुनाव देखा हो। उनके मुताबिक, आम जनता ज्ञानेश कुमार के काम का समर्थन करती है।
विज्ञापन
SIR को लेकर जारी है राजनीतिक विवाद
ज्ञानेश कुमार को लेकर यह बयान ऐसे समय आया है जबविशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद तेज है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं। ममता बनर्जी ने हाल में ज्ञानेश कुमार को हटाने, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। वहीं, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों में आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताए जाने का भी उल्लेख हुआ है। इस मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवाद को और बढ़ा दिया है।