भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय
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भाजपा के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रभारी और पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने आज टीएमसी राज्यसभा सांसद सागरिका घोष के आरोपों का खंडन किया। घोष ने केंद्र सरकार पर ईसाई संस्थानों और मिशनरीज ऑफ चैरिटी के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। मालवीय ने इसे गलत सूचना फैलाने और तथ्यों को जानबूझकर तोड़ने-मरोड़ने का प्रयास बताया। यह विवाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस दौरे के बाद शुरू हुआ।
मालवीय ने एक्स पर घोष की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर गलत सूचना फैलाने और तथ्यों को जानबूझकर तोड़ने-मरोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सागरिका घोष, ममता बनर्जी की कठपुतली हैं और उनकी आदत गलत सूचना फैलाने वाली हैं। मालवीय ने दावा किया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के 'मदर हाउस' दौरे के अलावा घोष के सभी बयान सरासर झूठ थे।
सरकार चर्च की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती
विवाद तब शुरू हुआ जब सागरिका घोष ने एक्स पर मार्को रुबियो के मिशनरीज ऑफ चैरिटी मुख्यालय के दौरे के बारे में पोस्ट किया। घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि रुबियो कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी के मदर हाउस में उनकी अनुकरणीय मानवीय सेवा को सलाम कर रहे हैं।
उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर पाखंड का आरोप लगाते हुए लिखा, नरेंद्र मोदी सरकार का सरासर पाखंड प्रदर्शित हो रहा है। केंद्र को ईसाई विरोधी बताते हुए, घोष ने आरोप लगाया कि सरकार ने नए प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक के माध्यम से मिशनरीज ऑफ चैरिटी को विदेशी सहायता प्राप्त करने से रोक दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार चर्च की संपत्तियों पर कब्जा करने में सक्षम बना रही है और ऐसे उपाय ईसाई संस्थानों की मानवीय, शैक्षिक और स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने की क्षमता को नष्ट कर रहे हैं।
मालवीय ने सागरिका के आरोप को बताया झूठा
मालवीय ने आलोचना करते हुए कहा सागरिका घोष के आरोप सरासर झूठे हैं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियां गलत सूचना के माध्यम से भारत की छवि खराब करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास थीं। भाजपा नेता ने उनके आचरण को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आचरण को स्पष्ट रूप से उजागर किया जाना चाहिए।
मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थिति
मालवीय ने स्पष्ट किया कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी एफसीआरए के तहत पंजीकृत है। संस्था के पास एक सक्रिय एफसीआरए पंजीकरण है। इस पंजीकरण की वैधता 31 दिसंबर 2026 तक है। उन्होंने यह भी बताया कि आज की तारीख में इसकी एफसीआरए स्थिति से संबंधित कोई आवेदन लंबित नहीं है। ये तथ्य घोष के उन दावों का खंडन करते हैं कि सरकार ने संस्था को विदेशी सहायता प्राप्त करने से रोक दिया है।