कबीर ने आरोप लगाया कि वे मुख्यमंत्री और टीएमसी के धर्मनिरपेक्ष राजनीति पर दोहरे रुख को उजागर करेंगे और कहा कि पार्टी अल्पसंख्यकों को बहकाती रही है। है। उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर का कार्यक्रम रद्द नहीं होगा और अगर प्रशासन अनुमति नहीं देता तो वे धरने पर बैठकर गिरफ्तारी देंगे।
अपने निलंबन के बाद हुमायूं ने कहा, "जब वह (ममता बनर्जी) पहली बार सत्ता में आई थीं, तब उनके पास 182 सीटें थीं। मुझे उनकी जरूरत थी और मुझे पार्टी में शामिल किया गया। मेरे साथ यह 12-13 साल तक क्यों किया जाता रहा? मुझे पार्टी में शामिल ही क्यों किया गया? आज मुख्यमंत्री लोगों से फंड्स लेकर जगन्नाथ मंदिर बनवा रही हैं। वे दुर्गा पूजा के लिए फंड्स देते हैं। मौलवियों को हर महीने 3000 रुपये का भत्ता दिया जा सकता है। सभी भत्तों को मिला दिया जाए तो 54 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि समितियों को हर साल एक लाख 10 हजार रुपये तक दिए जाते हैं। वे पूरी तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का काम कर रही हैं।"
राजभवन की आलोचना करते हुए उन्होंने राज्यपाल बोस द्वारा राज्य सरकार को लिखे पत्र को उन्होंने निराधार, राजनीति से प्रभावित और संवैधानिक अनुशासन से परे बताया। इस पत्र में बोस ने कानून-व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। कबीर ने कहा, ‘‘वह निर्वाचित व्यक्ति नहीं हैं। कानून-व्यवस्था राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उनका डर निरर्थक है और उनकी सलाह अनावश्यक है।’’
मुर्शिदाबाद प्रशासन ने फिलहाल उन्हें कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है। जिला अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, इस पर कबीर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘अगर प्रशासन हमें रोकने की कोशिश करेगा, तो रेजिनगर से बेहरामपुर तक का राजमार्ग अवरुद्ध कर दिया जाएगा। मेरा संदेश साफ है- आग से मत खेलो।’’
Bengal: 'मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी मस्जिद की नहीं दी जाएगी इजाजत', राज्यपाल बोस का बड़ा बयान; जारी की चेतावनी