कांग्रेस और वाम दलों ने सोमवार को फैसला किया कि पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव में वे 2016 के चुनाव में जीती हुईं सीटों को अपने-अपने पास रखेंगे। उनका बंटवारा नहीं किया जाएगा। दोनों दल इन सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे।
वाम-कांग्रेस गठबंधन ने 2016 में 77 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसमें से कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘आज हमने फैसला किया कि हम 44 और 33 सीटें अपने-अपने पास रखेंगे जिन पर कांग्रेस और वाम दल को जीत मिली थी। बाकी की 217 सीटों को लेकर चर्चा चल रही है।’
इसी माह हो जाएगा बाकी सीटों को बंटवारा
भट्टाचार्य ने उम्मीद जताई कि इस महीने के अंत तक सीटों के बंटवारे समझौते का काम पूरा हो जाएगा। पश्चिम बंगाल वाम मोर्चा के अध्यक्ष और माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने कहा कि संयुक्त प्रचार अभियान पर भी चर्चा हुई, जिस बैठक में यह फैसला हुआ उसमें बोस भी मौजूद थे।
ज्ञात हो कि पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर सियासी घमासान छिड़ चुका है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी भाजपा के बीच वाकयुद्ध चरम पर है। वहीं कांग्रेस व वामदल भी गठबंधन के साथ एक बार पुन: ताल ठोंकने जा रहे हैं।
मौजूदा हालात में मुख्य मुकाबला ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस व केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के बीच ही नजर आ रहा है। भाजपा ने ममता सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रखी है। ममता की पार्टी के कई मंत्री समेत बड़े नेता भाजपा में शामिल होकर दीदी की मुसीबत बढ़ा चुके हैं।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल अप्रैल-मई में चुनाव होने की संभावना है।