सार
2011 के चुनावों में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, वहीं 2016 में तीन और 2021 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती नजर आ रही है। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में लेफ्ट फ्रंट को 29 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट के खाते में केवल 7.46 फीसदी वोट और 2021 के विधानसभा चुनाव में केवल 4 सीट आई हैं।
पश्चिम बंगाल के शुरुआती नतीजों के मुताबिक, 2011 से लेकर अभी तक सत्ता पर बरकरार सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस को काेई खासा नुकसान होता नजर नहीं आ रहा है। लेकिन भाजपा की बात करें तो पिछले दस सालों में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति लगातार मजबूत होती नजर आ रही है। बता दें 2011 के चुनावों में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, वहीं 2016 में तीन और 2021 में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ती नजर आ रही है।
भाजपा का बंगाल में मजबूत होने का यह है प्रमुख कारण
जहां एक तरफ वर्ष 2014 तक बंगाल की राजनीति में भाजपा का नामों निशान नहीं था। वहीं 2021 के विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सिमटकर रह गए हैं। गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बंगाल में लेफ्ट फ्रंट को 29 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में लेफ्ट फ्रंट के खाते में केवल 7.46 फीसदी वोट और 2021 के विधानसभा चुनाव में केवल 4 सीट आई हैं। इसी वजह से भाजपा के कामयाबी का कारण लेफ्ट फ्रंट का कमजोर पड़ना बताया जा रहा है।