पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की नई राजनीतिक पार्टी को चुनाव आयोग से प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। पार्टी का नाम आम जनता उन्नयन पार्टी रखा गया है। अंतिम पंजीकरण के लिए अभी कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। मुर्शिदाबाद जिले के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर द्वारा गठित नई राजनीतिक पार्टी को चुनाव आयोग से प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है।
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हुमायूं कबीर ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से उन्हें आधिकारिक सूचना मिली है, जिसमें उनकी नई पार्टी के पंजीकरण को लेकर प्रारंभिक मंजूरी दी गई है। उनकी पार्टी का नाम आम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखा गया है, जिसे संक्षेप में एजेयूपी कहा जाएगा। कबीर का कहना है कि उनकी पार्टी आम लोगों के मुद्दों को लेकर राजनीति करेगी और राज्य की राजनीति में एक नया विकल्प पेश करने की कोशिश करेगी।
नाम को लेकर करना पड़ा बदलाव
हुमायूं कबीर ने शुरुआत में अपनी पार्टी का नाम ‘जनता उन्नयन पार्टी’ रखने का प्रस्ताव दिया था। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने भी इस नाम की सिफारिश चुनाव आयोग मुख्यालय को भेजी थी। लेकिन बाद में आयोग ने बताया कि इसी नाम से पहले से एक पार्टी पंजीकृत है। इसके बाद कबीर ने नाम बदलकर ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ कर दिया, जिसके बाद आयोग ने इसे प्रारंभिक मंजूरी दी।
अंतिम पंजीकरण की प्रक्रिया जारी
चुनाव आयोग से मिली मंजूरी अभी शुरुआती चरण की है। अंतिम और आधिकारिक पंजीकरण के लिए कुछ और औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इस प्रक्रिया के तहत पार्टी को अखबारों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करनी होगी ताकि अगर किसी को आपत्ति हो तो वह सामने आ सके। अगर तय समय सीमा के भीतर कोई आपत्ति नहीं आती है, तो पार्टी को अंतिम पंजीकरण दे दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक यह प्रक्रिया करीब दो सप्ताह में पूरी हो सकती है।
टीएमसी से निलंबन के बाद उठाया कदम
हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस ने उस समय निलंबित कर दिया था जब उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में प्रस्तावित मस्जिद के शिलान्यास समारोह की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि यह मस्जिद अयोध्या की बाबरी मस्जिद की वास्तुकला शैली पर आधारित होगी। इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया और पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला किया।