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West Bengal Election: पहले चरण में इन दिग्गजों की किस्मत ईवीएम में कैद, कहां सबसे तगड़ा मुकाबला?

Thu, 23 Apr 2026 06:58 PM IST
Kirtivardhan Mishra स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र का महापर्व शुरू हो गया। इसमें पहले चरण में 16 जिलों की कुल 152 विधानसभा सीटों पर वोट डाले गए। मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होकर शाम 6 बजे तक चला। इस दौरान बंगाल में बंपर वोटिंग दर्ज की गई। 
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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में गुरुवार (23 अप्रैल) को विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान संपन्न हुआ। इस चरण में राज्य की 294 में से 152 सीटों पर वोटिंग हुई। कुल वोटिंग 91 फीसदी से भी ज्यादा रहना तय है। राज्य में पिछली बार की तरह इस बार भी सीधा मुकाबला सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच होने का अनुमान है। हालांकि, कभी बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भी मुकाबले में हैं। इन दलों ने भी अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं।  
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ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर बंगाल में इस बार मतदाताओं और मतदान केंद्रों की क्या संख्या है? इस बार राज्य में कौन से खास चेहरे उतरे हैं? बंगाल में इस बार कड़ी टक्कर किस-किस सीट पर होने के आसार हैं? राज्य में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे? आइये जानते हैं...

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बंगाल में इस बार मतदाताओं और मतदान केंद्रों की क्या संख्या?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदाताओं और मतदान केंद्रों की संख्या में इस बार बदलाव हुआ है। 

निर्वाचन आयोग के मुताबिक, 2026 के चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में कुल 80,719 मतदान केंद्र बनाए गए।

इस बार चुनाव में कौन से खास चेहरे और खास मुकाबले? 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई हाई-प्रोफाइल और दिग्गज नेता चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से लेकर विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और कांग्रेस के पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी तक का नाम है। 

शुभेंदु अधिकारी: नंदीग्राम में 2021 की ऐतिहासिक जीत के बाद भाजपा के मुख्य चेहरे शुभेंदु अधिकारी इस बार नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम में पहले चरण में मतदान है। यहां उनका सीधा मुकाबला कभी उनके करीबी रहे और अब टीएमसी उम्मीदवार पबित्रा कर से रहा। 

अधीर रंजन चौधरी: कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद अब विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह बहरामपुर सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक सुब्रत मैत्रा को चुनौती दे रहे हैं।

दिलीप घोष: भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष खड़गपुर सदर से अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं। उनका कड़ा मुकाबला टीएमसी के प्रदीप सरकार से है, जिन्होंने 2019 के उपचुनाव में यह सीट जीती थी।

अग्निमित्रा पॉल: भाजपा की एक और प्रमुख नेता, जो अपनी मौजूदा आसनसोल दक्षिण सीट बचाने के लिए मैदान में उतरीं। उनके खिलाफ टीएमसी ने वरिष्ठ नेता तापस बनर्जी को उतारा।

निशीथ प्रमाणिक: पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रभावशाली नेता। उन्होंने अपनी पुरानी सीट दिनहाटा छोड़ दी और इस बार माथाभांगा सीट से टीएमसी के सब्लू बर्मन के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। 

उदयन गुहा: टीएमसी के राज्य मंत्री, जो निशीथ प्रमाणिक के जाने के बाद दिनहाटा सीट पर पार्टी का कब्जा बनाए रखने के लिए चुनाव लड़ रहे।

हुमायूं कबीर: टीएमसी के पूर्व मंत्री, जिन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था। अब वह अपनी नई पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के बैनर तले डोमकल सीट से चुनाव लड़ रहे। 

जाकिर हुसैन: 'बीड़ी किंग' के नाम से मशहूर टीएमसी उम्मीदवार जाकिर हुसैन जंगीपुर से मैदान में हैं। घोषित 133 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ वह इस चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवार हैं।

कृष्णा कल्याणी: रायगंज सीट से टीएमसी के उम्मीदवार। उन्होंने 2024 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी लेकिन बाद में पाला बदल लिया। उनका मुकाबला भाजपा के कौशिक चौधरी से है।

सुब्रत दत्ता: टीएमसी के टिकट पर ओन्दा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, वह उन उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन पर सबसे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनके अलावा बालुरघाट, ओन्दा, दार्जिलिंग और जंगीपुर सीटों पर भी सीमावर्ती मुद्दों, गोरखालैंड की क्षेत्रीय मांग और आपराधिक व धनबल वाले उम्मीदवारों की वजह से कड़ी और दिलचस्प टक्कर देखने को मिल सकती है।

पश्चिम बंगाल में पिछले चुनाव के क्या नतीजे थे? 

पश्चिम बंगाल में पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में हुए थे, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने भारी बहुमत से जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी। 

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2021 के चुनावों में लेफ्ट फ्रंट, कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के गठबंधन का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। पश्चिम बंगाल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि कांग्रेस और माकपा अपना खाता भी नहीं खोल पाए। इस गठबंधन में सिर्फ आईएसएफ को एक सीट पर जीत मिली।

दूसरी तरफ पिछले चुनाव में सबसे चर्चित मुकाबला नंदीग्राम सीट पर था। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सामना भाजपा के शुभेंदु अधिकारी (जो पहले टीएमसी में ही उनके करीबी थे) से हुआ था। इस कड़े मुकाबले में शुभेंदु ने ममता बनर्जी को लगभग 1,956 वोटों से हरा दिया था। हालांकि, ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज की थी।

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