बंगाल से ताल्लुक रखने वाले एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने कहा कि मुस्लिम तुष्टिकरण की पराकाष्ठा से एक वर्ग नाराज है। ऐसी मान्यता हो गई है कि कहीं हिंदू और मुस्लिम के बीच विवाद हो तो सत्तासीन दल की शह पर प्रशासन मुस्लिमों का पक्ष लेगा। पहले ऐसा नहीं था। हाल के दिनों में बांग्लादेशी मुस्लिमों की असामाजिक गतिविधियों में लिप्तता के चलते लोगों में एक डर भी बैठ गया है। कोलकाता में एक किराने की दुकान चलाने वाले रमेश कहते हैं कि बांग्लादेशी मुसलमानों की बढ़ती संख्या और उसके प्रभाव के कारण आज हम जैसे कई लोगों की रोजी-रोटी भी प्रभावित होने लगी है। उनकी तादाद इतनी हो गई है कि उन्हें काम ज्यादा सहूलियत से मिल जाता है।