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ऋतब्रत का ममता पर सीधा वार: कहा-15 साल से पंगु बंगाल विधानसभा; न कामकाज के दिन बढ़े, न मिला विपक्ष को मान

Tue, 16 Jun 2026 08:45 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, कोलकाता।

सार

नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी पर विधानसभा को कमजोर करने और विपक्ष को दबाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सदन में कामकाजी दिन बढ़ाने की मांग करते हुए ममता बनर्जी की राजनीति को 'व्यक्ति पूजा' और जनादेश को न स्वीकार करने वाला 'खतरनाक मोड' बताया है।
 
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नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, बंगाल विधानसभा - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र से पहले सर्वदलीय और बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक हंगामेदार रही। बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष और निष्कासित टीएमसी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला। ऋतब्रत बनर्जी ने साफ-साफ कहा कि पिछले 15 वर्षों से बंगाल विधानसभा को उस तरह नहीं चलने दिया गया, जैसी लोकतांत्रिक परंपरा रही है। विपक्ष को बाहर रखकर कोई भी लोकतंत्र कभी आगे नहीं बढ़ सकता।
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काम के दिनों में सबसे पीछे बंगाल: बनर्जी
ऋतब्रत बनर्जी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद हैरान करने वाला तथ्य है कि पिछले 15 वर्षों में कामकाजी दिनों के मामले में पश्चिम बंगाल विधानसभा पूरे देश में सबसे आखिरी पायदान पर रही है। हम राष्ट्रीय औसत से भी काफी नीचे चल रहे हैं। हमने सरकार और स्पीकर से इस स्थिति को बदलने की मांग की है। लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए विधानसभा के कामकाजी दिनों को बढ़ाना बेहद जरूरी है।

संवाद बनाम एकालाप की लड़ाई
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि आगामी सत्र के लिए विपक्ष ने चर्चा के लिए अधिकतम समय की मांग की थी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर छह घंटे और बजट पर 10 घंटे चर्चा होगी। इसके साथ ही विपक्ष को अपनी बात रखने के लिए 50 फीसदी समय दिया जाएगा। ऋतब्रत बनर्जी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र के लिए एक स्वस्थ संकेत है। अगर सरकार अपने वादों को पूरा करती है तो ठीक है, वरना विपक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में एकालाप के खिलाफ संवाद बेहद जरूरी है।
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'व्यक्ति पूजा' के खिलाफ सामूहिक संघर्ष
20 बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई में विलय के फैसले पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। ओम बिरला ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने अपना फैसला ले लिया है। स्पीकर के कदम पर वे कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। लेकिन यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ हमारा सामूहिक संघर्ष है। हम सब मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगे।
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हार स्वीकार न करना खतरनाक-ऋतब्रत बनर्जी
ममता बनर्जी की ओर से भवानीपुर विधानसभा चुनाव के नतीजों को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर ऋतब्रत बनर्जी ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जब आप जीतते हैं तो सब ठीक होता है, लेकिन हारते ही सब गलत हो जाता है। यह मानसिकता लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। चुनाव में हार-जीत चलती रहती है, नेताओं को जनता के जनादेश का सम्मान करना चाहिए। हारने के बाद भी खुद को विजेता बताना एक खतरनाक 'डिनायल मोड' है, जो लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाता है।
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