पश्चिम बंगाल सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए ‘अर्जुन वाहिनी’ गठित की है। पहले चरण में 200 पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। एनडीआरएफ की तर्ज पर प्रशिक्षित यह बल सुंदरबन और पहाड़ी क्षेत्रों में राहत-बचाव करेगा। प्रमुख को 40 हजार और सदस्यों को 25 हजार रुपये मासिक मानदेय मिलेगा।
पश्चिम बंगाल सरकार ने बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए विशेष ‘अर्जुन वाहिनी’ गठित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पहले चरण में राज्य सैनिक बोर्ड के माध्यम से 200 पूर्व सैनिकों को इस विशेष बल में शामिल किया गया है। सभी चयनित कर्मी 40 वर्ष से कम उम्र के सेवानिवृत्त सैनिक हैं।
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मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य में भारतीय सेना से चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को भी इस आपदा प्रतिक्रिया बल में प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों की सैन्य प्रशिक्षण और आपात परिस्थितियों में काम करने के अनुभव का इस्तेमाल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में करना है।
एनडीआरएफ की तर्ज पर प्रशिक्षण राज्य सरकार के अनुसार, ‘अर्जुन वाहिनी’ को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर प्रशिक्षित किया जाएगा। सदस्यों को दुर्गम और जोखिम वाले इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए आधुनिक उपकरण और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सुंदरबन और पहाड़ी क्षेत्रों जैसे आपदा संभावित इलाकों में इस बल की तैनाती की जाएगी। इन क्षेत्रों में चक्रवात, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तत्काल राहत एवं बचाव कार्य में इसकी भूमिका होगी।
40 हजार तक मिलेगा मानदेय
सरकार के मुताबिक, अर्जुन वाहिनी के प्रमुख को ‘वीर नायक’ के रूप में 40 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जाएगा, जबकि सदस्यों को 25 हजार रुपये मिलेंगे। मानदेय में हर साल तीन प्रतिशत की वृद्धि होगी। ड्यूटी के दौरान सदस्य की मौत होने पर परिवार को 10 लाख रुपये और गंभीर चोट के कारण स्थायी शारीरिक अक्षमता की स्थिति में पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है।