भारत में ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने मौजूदा वैश्विक स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। शनिवार को बंगलूरू में उन्होंने ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच जारी तनाव को 'न युद्ध, न शांति' की स्थिति जैसे बताया है। उन्होंने कहा कि स्थिरता अब उन लोगों के हाथों में है जिन्होंने इस युद्ध की शुरुआत की है।
इलाही ने कहा, 'ईरान यह युद्ध नहीं चाहता था। ईरान को युद्ध के लिए मजबूर किया गया। कई बार ईरान ने इससे बचने की कोशिश की। मुझे नहीं पता कि अमेरिका और इस्राइल की क्या स्थिति है? वे दूसरे देशों पर अपनी इच्छाएं थोपना चाहते हैं। उन्हें यह अधिकार किसने दिया?' उन्होंने बताया कि ओमान और जिनेवा में बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही थी, लेकिन अचानक हुए हमलों ने शांति को अशांति में बदल दिया।
मासूमों की मौत और भारी तबाही का दावा
ईरानी प्रतिनिधि इलाही ने जान-माल के नुकसान को लेकर भी कई दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि हवाई हमलों और मिसाइलों के कारण ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, कई मंत्रियों और कमांडरों की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन हमलों में नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इलाही ने कहा, 'उन्होंने एक प्राइमरी स्कूल पर हमला किया और 175 मासूम लड़कियों को मार डाला।' इलाही ने दावा किया कि इस जंग में अब तक 4,000 से अधिक लोगों की मौत और 40,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। साथ ही अस्पताल और विश्वविद्यालय को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान का झुकने से साफ इनकार
उन्होंने कहा कि इन सबके बावजूद ईरान बिना शर्त आत्मसमर्पण के दबाव के आगे नहीं झुका। इलाही के शब्दों में, 'वे बिना शर्त आत्मसमर्पण चाहते थे, जिसे कोई भी स्वीकार नहीं कर सकता। ईरान ने कहा कि हम बलिदान देने को तैयार हैं, लेकिन झुकने को तैयार नहीं।' इलाही ने आगे कहा कि अमेरिका और इस्राइल ने युद्ध विराम का प्रस्ताव तभी रखा जब 40 दिनों के संघर्ष के बाद उन्हें समझ आ गया कि वे अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकते।
भारत के साथ 5,000 साल पुरानी दोस्ती- इलाही
इसके अलावा होर्मुज को लेकर उन्होंने कहा कि ईरान ने हमेशा इसकी सुरक्षा की है। उन्होंने भारत के साथ संबंधों की जमकर तारीफ की। इलाही ने कहा, 'भारत एक महान देश है। हमारे संबंध 5,000 साल पुराने हैं। हम शिक्षा, दर्शन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि ईरान ने भारतीय जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति दी है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय सहयोग को बताता है।