पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच गैस की संभावित कमी और कालाबाजारी को रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री बच्चू कडू ने बताया कि गैस सिलिंडर की अवैध बिक्री और जमाखोरी के खिलाफ राज्यभर में कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत कई जगह छापेमारी की गई और बड़ी संख्या में सिलिंडर जब्त किए गए। सरकार का कहना है कि आम लोगों को गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
मंत्री बच्चू कडू ने विधान परिषद में बताया कि राज्य सरकार ने अब तक 23 मामले दर्ज किए हैं और 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त समितियां बनाई गई हैं, जिन्होंने राज्यभर में 2129 छापे मारे। इन छापों में 1208 एलपीजी सिलिंडर और करीब 33.66 लाख रुपये का सामान जब्त किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई गैस की कृत्रिम कमी और जमाखोरी रोकने के लिए की गई है।
क्या गैस की कमी की आशंका है?
सरकार ने साफ किया है कि राज्य में रसोई गैस, एलपीजी और पाइप्ड गैस की कोई कमी नहीं है। मंत्री ने बताया कि उन्होंने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों से बातचीत की है। इन कंपनियों ने जानकारी दी है कि गैस उत्पादन बढ़ाकर 9 मीट्रिक टन से 11 मीट्रिक टन कर दिया गया है। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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केरोसिन को पेट्रोल पंपों पर बेचने की योजना क्यों?
सरकार ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर केरोसिन की आपूर्ति बढ़ाई जाएगी। राज्य में केरोसिन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सहयोग से पेट्रोल पंपों के माध्यम से केरोसिन उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि अगर कहीं एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होती है तो लोगों को वैकल्पिक ईंधन मिल सके।
एलपीजी वितरण में किसे मिलेगी प्राथमिकता?
सरकार ने एलपीजी सिलिंडर के वितरण को लेकर प्राथमिकता तय की है। सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को गैस उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, श्मशान घाट, वृद्धाश्रम और अनाथालय जैसी सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। रक्षा क्षेत्र, रेलवे, हवाई यातायात, पुलिस और जेलों को भी गैस आपूर्ति में प्राथमिकता दी जाएगी। दवा, बीज और मत्स्य पालन से जुड़े उद्योगों को भी गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है।
गैस और खाने के तेल की कीमतों में कितना बदलाव हुआ?
मंत्री ने बताया कि पिछले महीने घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 852.50 रुपये थी, जो 7 मार्च को बढ़कर 912.50 रुपये हो गई। वहीं वाणिज्यिक सिलिंडर की कीमत 1720.50 रुपये से बढ़कर 1835 रुपये हो गई है। इसके अलावा खाने के तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल की कीमतों में पिछले महीने के मुकाबले कुछ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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