चीन ने ऑस्ट्रेलिया को सप्लाई होने वाला जेट फ्यूल रोक दिया है। दूसरी ओर पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति भी अस्थिर है। चीन के इस कदम से ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वो खुद जेट फ्यूल नहीं बनाता और चीन से बड़े पैमाने पर ईंधन आयात करता है।
ऑस्ट्रेलिया में तरल ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ गया है। इसकी वजह चीन की तरफ से तेल रिफाइनरी को सभी ईंधन निर्यात रोकने का आदेश देना है। साथ ही, ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति भी अनिश्चित बनी हुई है। ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी रिफाइनरी को सभी ईंधन के निर्यात पर रोक लगाने के लिए कहा है। इससे ऑस्ट्रेलिया के लिए आने वाले कम से कम दो जहाजों पर असर पड़ सकता है।
साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो परिवहन जहाज भी नष्ट हो गए हैं। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग में आने वाले जहाजों की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। बता दें कि एशियाई देश जैसे चीन से ऑस्ट्रेलिया अपने तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऑस्ट्रेलिया खुद जेट फ्यूल बनाने की क्षमता नहीं रखता।
ऑस्ट्रेलिया पूरी तरह से जेट फ्यूल पर निर्भर
ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों पर असर
हवाई अड्डे अपने स्टॉक का सहारा लेंगे।
जल्दी ही ईंधन खत्म हो जाएगा।
आपातकालीन और सैन्य उड़ानों को प्राथमिकता दी जाएगी।
व्यावसायिक उड़ानों में कटौती और रेशनिंग हो सकती है।
हालांकि क्वांटस ने पहले ही कहा है कि उन्हें फ्लाइट की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, लेकिन अभी उड़ानें रद्द नहीं हुई हैं। वहीं एयर न्यूजीलैंड ने ईंधन की कीमत और आपूर्ति की वजह से 1,100 उड़ानों को काट दिया है। दूसरी ओर विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि आने वाले हफ्तों में उड़ानों में कटौती, रद्द या रेशनिंग की संभावना बढ़ सकती है।