भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सूचना के अधिकार के तहत इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया है कि नोटबंदी से पहले इस पर वित्त मंत्री या मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के विचार लिए गए थे अथवा नहीं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को अचानक 500 और 1,000 के नोट बंद करने की घोषणा की थी।
आरबीआई ने कहा कि कानून के तहत यह दी जाने वाली सूचनाओं की परिभाषा के दायरे में नहीं आता। आवेदक ने पूछा था कि क्या नोटबंदी की घोषणा से पहले मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली के विचार लिए गए थे। रिजर्व बैंक ने आरटीआई के जरिए पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि इस तरह का सवाल, जिसमें सीपीआईओ की राय मांगी गई है, आरटीआई कानून की धारा 2(एफ) के तहत यह सूचना की परिभाषा में नहीं आता।
क्या मांगी गई सूचना सीपीआईओ से ‘राय मांगने’ के तहत आती है, पर पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एएन तिवारी ने कहा कि ऐसा नहीं है। आरटीआई आवेदक ने तथ्य के बारे में जानकारी मांगी है। सीपीआईओ यह नहीं कह सकता कि उससे राय मांगी गई है। पूर्व सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने कहा कि इसे कैसे राय मांगना कहा जा सकता है? क्या किसी से विचार-विमर्श किया गया या नहीं, रिकार्ड का मामला है। यदि सवाल यह होता कि क्या विचार लिए गए थे, तो यह राय मांगना होता। उन्होंने रिजर्व बैंक के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के जवाब पर हैरानी जताई।