बंगाल में सक्रिय मानसून और ओडिशा के अंदरूनी हिस्से में बने डिप्रेशन के असर से शुक्रवार को राज्य के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। सबसे ज्यादा असर उत्तर बंगाल के पहाड़ी जिलों में दिखा। दार्जिलिंग में तेज बारिश के बीच भूस्खलन हुआ, जिससे तकदाह ग्रामीण अस्पताल प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने दार्जिलिंग समेत कई जिलों में शनिवार तक भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है।
दार्जिलिंग के अस्पताल में भूस्खलन से क्या हुआ?
- शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे दार्जिलिंग के तकदाह ग्रामीण अस्पताल के पास भूस्खलन हुआ। मलबे की चपेट में आने से एक मरीज के रिश्तेदार को मामूली चोट लगी। अस्पताल में भर्ती किसी मरीज को चोट नहीं आई।
- घटना के बाद मरीजों को जिला अस्पताल ले जाया गया। दार्जिलिंग के दूसरे इलाकों में भी भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं, लेकिन मलबा जल्द हटाए जाने से ज्यादातर सड़कें यातायात के लिए खुली रहीं। भारी बारिश को देखते हुए दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भूस्खलन की आशंका जताई गई है।
बंगाल के किन इलाकों में बारिश का अलर्ट?
मौसम विभाग ने दार्जिलिंग में शनिवार सुबह तक भारी से बहुत भारी बारिश और इसके बाद रविवार तक भारी बारिश का अनुमान जताया है। कालिम्पोंग और जलपाईगुड़ी में भी ऐसे ही मौसम की संभावना है। दक्षिण और पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकाुरा, पश्चिम बर्धमान, बीरभूम, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम में शनिवार सुबह तक भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और निचले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बना हुआ है।
ओडिशा और आंध्र प्रदेश में क्या है स्थिति?
- ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भी डिप्रेशन के कारण भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम तंत्र आंध्र प्रदेश में तट पार करने के बाद कमजोर होकर डिप्रेशन में बदल गया और शुक्रवार सुबह दक्षिणी आंतरिक ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ के आसपास था।
- ओडिशा में 8000 से अधिक लोगों को निचले और भूस्खलन संभावित इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। कई जगह जलभराव, भूस्खलन, पेड़ गिरने और मकानों को नुकसान की खबर है। ओडिशा के पांच जिलों में शुक्रवार को स्कूल भी बंद रहे।
बारिश से ट्रेन और सड़क सेवाओं पर कितना असर पड़ा?
ओडिशा में मालिगुड़ा और छत्रीपुट स्टेशनों के बीच भूस्खलन से रेल सेवाएं प्रभावित हुईं। एहतियात के तौर पर चार ट्रेनें रद्द की गईं, जबकि कुछ ट्रेनों को बीच के स्टेशनों से ही समाप्त या वहीं से शुरू किया गया। आंध्र प्रदेश में भी भारी बारिश से सड़कें और खेत पानी में डूब गए। अनकापल्ली और चोडावरम को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। पार्वतीपुरम मान्यम जिले में लगातार बारिश से तालाब, नहरें और छोटी नदियां उफान पर आ गईं।
आंध्र में कितनी बारिश हुई और आगे क्या चेतावनी है?
आंध्र प्रदेश के उत्तर तटीय हिस्सों में भी भारी बारिश हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विशाखापट्टनम में 28 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। कोय्यालागुडेम में 20 सेंटीमीटर और भीमुनिपट्टनम, काकीनाडा तथा पेड्डापुरम में 15-15 सेंटीमीटर बारिश हुई। शुक्रवार को अल्लूरी सीतारामराजू, एनटीआर और एलुरु जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। तटीय आंध्र और यनम में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिनके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
झारखंड और बंगाल में भी क्यों बढ़ी चिंता?
डिप्रेशन के प्रभाव से झारखंड में भी हल्की से मध्यम बारिश हुई। मौसम विभाग ने रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी थी। कई जिलों में तेज हवा और आकाशीय बिजली की भी आशंका जताई गई। पश्चिम बंगाल में भी गुरुवार से भारी बारिश का दौर जारी है। बांकाुरा के कंसाबती बांध में 24 घंटे में 100 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। मौसम तंत्र के कमजोर होने के बावजूद इससे जुड़े बारिश के प्रभाव कई इलाकों में बने हुए हैं।
मौसम तंत्र अब किस दिशा में बढ़ रहा है?
मौसम विभाग के अनुसार आंध्र प्रदेश के तट से गुजरने वाला गहरा दबाव क्षेत्र अब कमजोर होकर डिप्रेशन बन चुका है। शुक्रवार सुबह यह ओडिशा के नुआपाड़ा के पास दक्षिणी आंतरिक ओडिशा और उससे लगे छत्तीसगढ़ के ऊपर केंद्रित था। इसके अगले कुछ घंटों तक उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और फिर धीरे-धीरे कमजोर होकर कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई है। इसलिए बंगाल, ओडिशा, झारखंड और आसपास के इलाकों में बारिश से जुड़ी स्थिति पर नजर बनी हुई है।