भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले दो दिनों तक देश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 'भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों, विशेषकर उत्तर प्रदेश और असम, मेघालय समेत उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों, प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में बुधवार को भारी बारिश होने की संभावना है। पाकिस्तान और आसपास के पश्चिमी राजस्थान में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है।'
मॉनसून गर्त का पश्चिमी छोर में कम दबाव की रेखा के साथ सामान्य स्थिति में पश्चिमी राजस्थान के गंगानगर से लेकर बंगाल की खाड़ी तक और पूर्वी छोर हिमालय की तलहटी के करीब स्थित है। एक चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम बंगाल में गंगा नदी के इलाके के ऊपर और दूसरा चक्रवाती परिसंचरण दक्षिणी असम और इसके आसपास के इलाकों पर छाया हुआ है।
आईएमडी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, बिहार, तटीय आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी के यनम, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ व्यापक और भारी बारिश की आशंका जताई है।
पूर्वी क्षेत्र में निचले स्तर की गरज वाली हवाएं और मध्य-स्तर पर आंशिक रूप से पश्चिमी गर्त के बीच उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में गुरुवार को व्यापक और भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं, देश के मध्य क्षेत्र में बुधवार और गुरुवार दोनों दिन भारी बारिश की संभावना है।
रायलसीमा, तटीय और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु सहित प्रायद्वीपीय भारत में अगले तीन-चार दिनों के दौरान भारी बारिश होने की संभावना है। बुधवार और गुरुवार को दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
आईएमडी के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र के वैज्ञानिक आरके जेनामनी ने कहा कि 'जब भी मॉनसून का गर्त उत्तर की ओर बढ़ता है, एक अभिसरण क्षेत्र चरम दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्र में विकसित होता है। परिणामस्वरूप, अगले कुछ दिनों में केरल में भारी बारिश होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी के ऊपर किसी तरह के कम दबाव के क्षेत्र के विकास की संभावना नहीं है। हम देश के बाकी हिस्सों में मानसून के कम होने की उम्मीद कर रहे हैं।'
उन्होंने बताया कि देशभर में एक जून से अब तक मानसून के दौरान नौ फीसदी अधिक बारिश हुई है। आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिणी प्रायद्वीप और मध्य भारत में 20 फीसदी अधिक बारिश हुई है, उत्तर-पश्चिम में नौ फीसदी की कमी और देश के पूर्व और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में दो फीसदी अधिक बारिश हुई है।