दिसंबर माह की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन अब तक कड़ाके की सर्दी पड़ना शुरू नहीं हुई है। राजधानी दिल्ली समेत समूचे उत्तर भारत में हल्की ठंड महसूस हो रही हैं। लेकिन आने वाले दिनों में ठिठुरन का सामना करना पड़ सकता है। उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में जैसे ही पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा। वैसे ही राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत और अन्य राज्यों में ठंड का असर दिखाई देना शुरू हो जाएगा।
अमर उजाला से चर्चा में निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट वेदर के मौसम वैज्ञानिक महेश पहलावत का कहना है कि, आने वाले दिनों में पहाड़ों में सघन हिमपात होगा। इसके प्रभाव से उत्तरी—पश्चिमी हवाएं मैदानी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ेगी। उम्मीद की जा रही है कि 11-12 दिसंबर के बाद ये हवाएं शुरु हो जाएगी। इन हवाओं के बाद से ही उत्तर भारत समेत अन्य राज्यों में ठंड का प्रकोप तेजी से बढ़ेगा। फिर ये ठंड जनवरी के अंत जारी रहेगी। जबकि इस दौरान उत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में बारिश भी देखने को मिलेगी। इससे ठंड में तेजी आने की संभावना है।
पहलावत कहते है कि, हालांकि, इस बीच न्यूनतम तापमान में धीरे-धीरे गिरावट आती रहेगी। फिर भी यह पांच से छह डिग्री के आसपास स्थिर रहेगा। सात-आठ दिसंबर के आसपास जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों में पश्चिमी विक्षोभ की स्थिति बनने की उम्मीद है। इस विक्षोभ का सीधा असर हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन-चार दिनों के बाद दिख सकता है। उत्तर की ठंडी हवाएं तेजी से नीचे की ओर आएंगी और विस्तृत क्षेत्र में फैल जाएंगी। दिल्ली से रांची और रायपुर तक न्यूनतम तापमान में गिरावट आ सकती है।
नवंबर के बाद दिसंबर भी रह सकता एक दशक में सबसे गर्म
नवंबर के बाद दिसंबर भी एक दशक में सबसे गर्म रह सकता है। आमतौर पर दिसंबर के पहले सप्ताह तापमान 24 से 26 डिग्री के आसपास रहता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, इस साल आठ दिसंबर तक तापमान 24 डिग्री से नीचे जाने की संभावना नहीं है।2011 से अब तक दिसंबर के पहले हफ्ते में मौसम का ऐसा मिजाज नहीं दिखा था। मानसून के जाने के बाद से राजधानी में अब तक वर्षा नहीं हुई है। सितंबर के पहले हफ्ते के बाद से ही राजधानी का मौसम शुष्क चल रहा है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में यूं तो बरसात काफी कम होती है। लेकिन यह वर्षा ठंड को बढ़ाने के लिए काफी अहम होती है।
स्नो कवर एरिया घटा, बारिश बढ़ी
हिमालय पर बर्फ से ढंका क्षेत्र इस साल फरवरी की तुलना में 32 प्रतिशत तक घट गया है। साथ ही मानसून में इस बार 108 प्रतिशत बारिश हुई थी। इन दोनों फैक्टर्स की वजह से भी इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना कम है। पिछले साल यानी 2023 में स्नो कवर एरिया 40 प्रतिशत था और मानसूनी बारिश 94 प्रतिशत ही हुई, जिससे कड़ाके की ठंड पड़ी थी।