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केरल हाई कोर्ट की टिप्पणी: खाकी पहनने का यह मतलब नहीं कि न्यायपालिका के खिलाफ कुछ भी कह सकते हैं  

Thu, 02 Dec 2021 09:34 PM IST
Amit Mandal पीटीआई, कोच्चि

सार

हाई कोर्ट ने कहा कि हलफनामे की सामग्री बेहद विचलित करने वाली और अदालत को पीछे हटने के लिए भयभीत करने का प्रयास है।
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केरल हाईकोर्ट - फोटो : social media
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विस्तार
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केरल पुलिस द्वारा स्वयंभू प्राचीन वस्तु विक्रेता मोनसन मावुंकल के खिलाफ एक लंबित याचिका को बंद करने के लिए एक आवेदन दायर करने और याचिका के साथ हलफनामे में निहित मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश के खिलाफ आरोपों से नाराज हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि खाकी पहनने का मतलब यह नहीं है कि न्यायपालिका के खिलाफ कुछ भी कह सकते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि हलफनामे की सामग्री बेहद विचलित करने वाली और अदालत को पीछे हटने के लिए भयभीत करने का प्रयास है।

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न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने आवेदन को खारिज कर दिया और उस पुलिस अधिकारी पर केस का खर्च का जुर्माना लगाने पर भी विचार किया, जिसने अपने और अदालत के खिलाफ आरोपों वाला हलफनामा दायर किया था। लेकिन अभियोजन महानिदेशक के अनुरोध पर अदालत ने ऐसा करने से परहेज किया।

न्यायाधीश ने कहा, इस तरह के अंतरिम आवेदन (आईए), जो मेरे विचार में अदालत को डराने और एक विशेष परिणाम के लिए मजबूर करने के लिए है। इस तरह की सलाह या प्रयास नहीं किया जाना चाहिए था, इसे दबाया नहीं जाना चाहिए जैसा कि आज किया गया और अभियोजन महानिदेशक ने प्रार्थना की कि रिट याचिका को बंद किया जाए। 

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