पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप पर चुनावी अभियान के दौरान हुए हमले को लेकर भी टिप्पणी की। पीएम मोदी कहा- 'गोली लगने के बावजूद ट्रंप अपने देश के लिए डटे रहे। यह दिखाता है कि वह पूरी तरह से 'अमेरिका फर्स्ट' में विश्वास रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मैं 'इंडिया फर्स्ट' में विश्वास रखता हूं'। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक नेताओं को अक्सर मीडिया के नजरिए से ही देखा जाता है, जबकि वास्तविकता में वे अलग हो सकते हैं। पीएम ने कहा- 'अक्सर नेता एक-दूसरे से सही मायनों में मिलने का मौका नहीं पाते, जिससे गलतफहमियां बढ़ती हैं'।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान तभी निकलेगा जब दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर बैठेंगे। युद्ध के मैदान पर कभी समाधान नहीं हो सकता। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोडिमिर जेलेस्की के साथ के साथ अपने अच्छे संबंधों के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, मैं राष्ट्रपति पुतिन के सामने बैठकर मीडिया से कह सकता हूं कि ये युद्ध का समय नहीं है। मैंने जेलेंस्की को भी एक मित्रभाव से कहा कि दुनिया कितनी ही आपके साथ खड़ी क्यों न हो जाए। परिणाम युद्ध भूमि पर नहीं बातचीत से ही निकलने वाला है।
यह भी पढ़ें -
IND vs PAK: भारत और पाकिस्तान में कौन सी टीम बेहतर? पीएम मोदी ने दिया जवाब, चैंपियंस ट्रॉफी का भी जिक्र किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और चीन के बीच स्वस्थ और स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा की वकालत की है, ताकि मतभेद विवाद में न बदलें। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इतिहासिक संबंध हैं और संवाद के माध्यम से किसी भी मुद्दे का हल निकाला जाना चाहिए। पीएम मोदी ने लेक्स फ्रिडमैन के साथ अपने पॉडकास्ट में भारत-चीन संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा, 'हमारा ध्यान इस बात पर है कि मतभेद कभी भी विवाद में न बदलें। टकराव की जगह संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।'
पीएम मोदी ने गलवां संघर्ष का किया जिक्र
इस दौरान पीएम मोदी ने साल 2020 में गलवां घाटी में हुए संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान तनाव जरूर था, लेकिन हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद हालात में सुधार हुआ है। पीएम मोदी ने आगे कहा- 'हमने सीमा पर शांति बहाल करने के लिए कड़े प्रयास किए हैं। अब हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं और हम चाहते हैं कि 2020 से पहले जैसी स्थिति वापस आ जाए'।प्रधानमंत्री ने भारत और चीन के ऐतिहासिक व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा, 'दोनों देशों ने सदियों तक एक-दूसरे से सीखा है और एक समय में दोनों विश्व अर्थव्यवस्था के बड़े केंद्र थे।' उन्होंने प्रतिस्पर्धा को सकारात्मक रूप में लेने की बात कहते हुए कहा, 'प्रतिस्पर्धा कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन यह संघर्ष में नहीं बदलनी चाहिए।'