सोमनाथ शौर्य यात्रा के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारे गौरवशाली अतीत के इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। इस पर कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे ने सवाल खड़े किए और कहा कि प्रधानमंत्री को विकास की बात करनी चाहिए और जिसे इतिहास के बारे में जानना है, उसके लिए कॉलेज हैं।
कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने रविवार को सोमनाथ मंदिर को लेकर दिए गए पीएम मोदी के बयान पर तंज कसा। दरअसल पीएम मोदी ने कहा कि 'औपनिवेशिक मानसिकता वाले लोगों ने भारत के गौरवशाली अतीत के इतिहास को मिटाने की कोशिश की। इस पर प्रियांक खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि 'इतिहास के सबक देने के बजाय, प्रधानमंत्री को भारत में विकास पर ध्यान देना चाहिए। खरगे ने यह भी कहा कि जो कोई भी इतिहास जानना चाहता है, वह कॉलेज चला जाएगा।
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देश के विकास का ब्लू प्रिंट कहां है?
प्रियांक खरगे ने कहा, 'हमारे प्राचीन इतिहास के सबूत हैं, और हर किसी ने इसे अपने हिसाब से समझा है... लेकिन हम प्रधानमंत्री से क्या उम्मीद करते हैं? इतिहास के सबक? देश के लिए ब्लूप्रिंट कहां है? 11 साल हो गए हैं। सिर्फ नारे। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, या डिजिटल इंडिया का क्या हुआ? वे सब फ्लॉप हो गए। अगर आप कोई सवाल पूछते हैं, तो आपको देशद्रोही करार दे दिया जाता है। अगर हमें इतिहास के सबक चाहिए, तो हम कॉलेज जाएंगे।'
पीएम मोदी ने क्या कहा?
सोमनाथ में शौर्य यात्रा के समापन के बाद एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं ने पाठ्यपुस्तकों में ऐतिहासिक आक्रमणों के विवरण को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की और मंदिर पर हमले को लूट बताया गया। दुर्भाग्य से, आजादी के बाद, औपनिवेशिक मानसिकता वाले लोगों ने हमारे गौरवशाली अतीत को खत्म करने की कोशिश की। उन्होंने इतिहास को मिटाने के लिए हर संभव प्रयास किया। सोमनाथ मंदिर के लिए लड़ने वालों को उनका उचित सम्मान और महत्व नहीं दिया गया। कुछ इतिहासकारों और राजनेताओं ने तो इन हमलावरों के इतिहास को भी छिपाने की कोशिश की।
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पीएम मोदी ने कहा कि हमें हमारी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाया गया है कि सोमनाथ मंदिर को उसके खजाने को लूटने के लिए तोड़ा गया था। जबकि नफरत, अत्याचार और आतंक के क्रूर इतिहास को हमसे छिपाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सोमनाथ में 'शौर्य यात्रा' में हिस्सा लिया, जो 1026 में महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले और उसके जवाब में अटूट आस्था और जुझारूपन के एक हजार साल पूरे होने के मौके पर आयोजित की गई। 'शौर्य यात्रा' सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के हिस्से के रूप में आयोजित एक प्रतीकात्मक जुलूस है। यह साहस, बलिदान और उस अदम्य भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिसने सदियों की कठिनाइयों के बावजूद सोमनाथ को संरक्षित रखा।