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हम कांग्रेस के कर्मों का फल भुगत रहे हैं : जेटली

Fri, 10 Feb 2017 12:16 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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कांग्रेस पार्टी पर बैंको के जरिए चुनिंदा उद्योगपतियों को मदद पहुंचाने का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि यूपीए शासन में कुछ उद्योगपतियों को नार्थ ब्लाक के इशारे पर बैंको से ऋण मिले हैं। बैंको के फंसे कर्ज (एनपीए) की बढ़ोत्तरी के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए जेटली ने कहा है कि हम कांग्रेस के कर्मों का फल भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंको के बढ़ते एनपीए की चर्चा छेड़ कांग्रेस ने आत्मघाती कदम उठाया है। 
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वित्त मंत्री ने कहा कि बैंको के फंसे हुए सर्वाधिक कर्जे वर्ष 2007 से 2009 के बीच उस वक्त प्रदान किए गए, जब अर्थव्यवस्था बूम पर थी। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय बैंको का एनपीए 4.5 था। उसके बढ़ते ब्याज के कारण आज वह बढ़कर 5.2 हुआ है। दरअसल लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री विरप्पा मोइली ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि उसकी गलत नीतियों के वजह से बैंको का एनपीए बढ़ रहा है। गुरूवार को लोकसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने पलटवार कर मोईली के आरोपों का जवाब दिया। 

जेटली ने कहा कि यूपीए शासन ने बैंको पर सरकार का न सिर्फ अतिप्रबंधन था। बल्कि ऋण देने के मामले में भी सरकार ने पक्षपात किया। तत्कालिन वित्त मंत्री पर आरोप मढ़ते हुए उन्होंने कहा कि चुनिंदा लोगों को ऋण प्रदान कराने के लिए नार्थ ब्लाक तक से हस्तक्षेप हुए। उन्होंने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि 1200 करोड़ रूपया कर्ज लेने वाले व्यक्ति जोकि आज भगौडे के रूप में लंदन में हैं। उसे यूपीए ने मदद पहुंचाया था। जेटली ने कहा कि हमने एक व्यक्ति को भी बैंक से ऋण लेने में मदद नहीं की। 26 मई 2014 को सत्ता आने के बाद बैंको से ऋण लेने के मामले में हमने किसी को भी लाभ नहीं पहुंचाया है। 
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कैश के कारण अपराध बढ़ता है

कैश के कारण अपराध बढ़ता है
जेटली ने यूपीए शासन के 2012 की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कैश वाली अर्थव्यवस्था में ज्यादा अपराध होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के नोटबंदी कदम का बड़ा असर है। नकली नोट और पुराने नोटों की संख्या सुनिश्चित करने के बाद आरबीआई जल्द ही पुराने नोटों की वास्तविक संख्या का एलान करेगा।

जेटली ने कहा कि नोटबंदी के दौरान व्यक्तिगत आयकर और राज्यों के कर में उगाही हुई है। केवल दो ही राज्य ऐसे हैं जिनकी कर उगाही निचे गई है। कृषि क्षेत्र पर नोटबंदी के विपरित असर को अप्रभावी बताते हुए उन्होंने कहा कि फसल का रकबा बढ़ा है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी के दौरान दो पहिया गाडिय़ों की बिक्री घटी है और कार की बिक्री बढ़ी है। 

यूबीआई की चर्चा स्वागत योग्य
आर्थिक सर्वे में यूनिवर्सल बेसिक इंकम (यूबीआई) की चर्चा को स्वगात योग्य कदम बताते हुए जेटली ने कहा कि इसकी चर्चा समाज में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस सेवा के जरिए राज्य और केंद्र सभी की सब्सिडी को जोड़कर गरीबों को एकमुश्त एक रकम प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सरकार ने अपने यहां यूबीआई लागू करने का विचार किया है। इससे सब्सिडी की भ्रष्टाचार पर नकेल लगेगी। हालांकि आधार और जेएएम के उपयोग से बचत हुई है। 
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