कांग्रेस पार्टी पर बैंको के जरिए चुनिंदा उद्योगपतियों को मदद पहुंचाने का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि यूपीए शासन में कुछ उद्योगपतियों को नार्थ ब्लाक के इशारे पर बैंको से ऋण मिले हैं। बैंको के फंसे कर्ज (एनपीए) की बढ़ोत्तरी के लिए कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराते हुए जेटली ने कहा है कि हम कांग्रेस के कर्मों का फल भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंको के बढ़ते एनपीए की चर्चा छेड़ कांग्रेस ने आत्मघाती कदम उठाया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंको के फंसे हुए सर्वाधिक कर्जे वर्ष 2007 से 2009 के बीच उस वक्त प्रदान किए गए, जब अर्थव्यवस्था बूम पर थी। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय बैंको का एनपीए 4.5 था। उसके बढ़ते ब्याज के कारण आज वह बढ़कर 5.2 हुआ है। दरअसल लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री विरप्पा मोइली ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि उसकी गलत नीतियों के वजह से बैंको का एनपीए बढ़ रहा है। गुरूवार को लोकसभा में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने पलटवार कर मोईली के आरोपों का जवाब दिया।
जेटली ने कहा कि यूपीए शासन ने बैंको पर सरकार का न सिर्फ अतिप्रबंधन था। बल्कि ऋण देने के मामले में भी सरकार ने पक्षपात किया। तत्कालिन वित्त मंत्री पर आरोप मढ़ते हुए उन्होंने कहा कि चुनिंदा लोगों को ऋण प्रदान कराने के लिए नार्थ ब्लाक तक से हस्तक्षेप हुए। उन्होंने कहा कि इस बात के प्रमाण हैं कि 1200 करोड़ रूपया कर्ज लेने वाले व्यक्ति जोकि आज भगौडे के रूप में लंदन में हैं। उसे यूपीए ने मदद पहुंचाया था। जेटली ने कहा कि हमने एक व्यक्ति को भी बैंक से ऋण लेने में मदद नहीं की। 26 मई 2014 को सत्ता आने के बाद बैंको से ऋण लेने के मामले में हमने किसी को भी लाभ नहीं पहुंचाया है।