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मीडिया ने शरीफ और सेना को चेताया, दुनिया में अलग-थलग होने के कगार पर पाक

Mon, 17 Oct 2016 01:31 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Getty Images
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गोवा में दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पाकिस्तान को 'आतंक का पनाहगार' कहे जाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 'अलग-थलग' करने के लगातार प्रयासों के बाद पाकिस्तानी मीडिया ने नवाज शरीफ सरकार पर सवाल उठाने खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तानी अखबार 'द नेशन' ने लिखा है कि पाकिस्तान के प्रति अंतरराष्ट्रीय अलगाव बढ़ रहा है और इसके पीछे आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई न करना अहम कारण है। हफ्ते भर में यह दूसरी बार है जब एक अखबार ने नवाज शरीफ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी आलोचना की है। 
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'द नेशन' का यह संपादकीय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे पाकिस्तानी सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान का करीबी अखबार माना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मसला उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। रविवार को ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री ने अपने पांच संबोधनों में लगातार पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके बाद से पाकिस्तानी मीडिया ने अपनी सरकार के इरादों पर सवाल उठाने तेज कर दिए हैं। हालांकि भारत के नजरिए से यह अच्छी बात है कि उड़ी हमले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निंदा के बाद पाकिस्तान की सिविल सोसायटी उद्गिन है। 

आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर पाकिस्तान के कथित रणनीतिक साझेदार चीन की ओर से चिंता जताने का उल्लेख करते हुए अखबार कहता है कि 'सरकार को तुरंत सभी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर अपना वादा निभाना चाहिए।'
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पाक अलग-थलग पड़ गया, तो गंभीर होंगे परिणाम

फाइल फोटो
अखबार कहता है कि मोदी सरकार ने दिखा दिया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने को लेकर नई दिल्ली कितना प्रतिबद्ध है। सार्क बैठक को रद्द करने के साथ पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध.. बताता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को कमजोर करने के लिए मोदी सरकार किस हद तक जा सकती है। अगर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे और पाकिस्तान ऐसा कभी नहीं चाहेगा।

अखबार ने नवाज शरीफ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर सीधे तौर पर सवाल उठाया है। संपादकीय के मुताबिक 'यह स्वीकार करने की विनम्रता पाकिस्तान को दिखानी चाहिए उसे अच्छे और बुरे आतंकियों के बीच का अंतर नहीं पता।' अखबार ने आगे कहा है कि कुछ ही दिन पहले सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद ने आंतकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसके बारे में दिल्ली का आरोप है कि इन आतंकियों को पाकिस्तान का संरक्षण प्राप्त है। 

 
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डॉन की रिपोर्ट का भी जिक्र

'द नेशन' ने अपने संपादकीय में डॉन अखबार की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया है जिसमें कहा गया था कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार और मिलिट्री के बीच गहरे मतभेद हैं। अखबार ने नवाज शरीफ सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर सीधे तौर पर सवाल उठाया है।

अखबार कहता है, 'डॉन की रिपोर्ट सामने आने के बाद 'आतंकियों पर अपने रुख को स्पष्ट करने के बजाय सरकार ने रिपोर्टर सिरिल अल्मीडा पर ही देश से बाहर जाने पर बैन लगा दिया। सरकार का यह निर्णय (हालांकि बैन को अब हटा लिया गया है) उसकी अपरिपक्वता को दिखाती है और अल्मीडा की स्टोरी कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं थी, जैसा कि सरकार और सेना दावा कर रही हैं।'

पिछले सप्ताह एक और 'हार्ड हिटिंग' संपादकीय में 'द नेशन' ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर लिखा था। संपादकीय में अखबार ने सवाल उठाया कि क्यों पठानकोट हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ एक्शन लेना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन जाता है? जैसा कि सरकार और सेना मीडिया से कहती रही हैं।
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