विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा वार्ता रुकी नहीं है, बल्कि दोनों देशों ने अहम क्षेत्रों पर बातचीत में प्रगति की है। वहीं, चीन और भूटान के बीच विकास परियोजनाओं संबंधी बातचीत पर उन्होंने कहा, वे 24 दौर की बातचीत कर चुके हैं और भी कई दौर की बातचीत करेंगे। भारत पर इसके प्रभाव को लेकर हम पूरा ध्यान रख रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा, पिछले तीन सालों में दोनों देशों के बीच तनाव वाले छह बिंदुओं पर बातचीत में प्रगति हुई है। सीमा विवाद को लेकर एक और बैठक जल्दी होगी। उन्होंने कहा, भारत और चीन के बीच विवादों का सिलसिला 1962 से चला आ रहा है। 2020 में हुई झड़प के बाद दोनों देशों ने सीमा मुद्दों के समाधान के लिए लगातार कई दौर की बैठकें की हैं।
कैलाश मानसरोवर के पास बनेगी टनल
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जयशंकर ने कहा, कैलाश मानसरोवर के आसपास बुनियादी ढांचे का निर्माण हो रहा है, वहां एक टनल की जरूरत है, जिसे पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) काम कर रहा है। वहीं, चीन के दखल को लेकर उन्होंने कहा, अभी तक चीन की तरफ से ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं।
असम तक बढ़ेगी रेल कनेक्टिविटी
इस साल 23 अप्रैल को भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की 18वें दौर की बैठक में चुशुल मोल्डो सीमा पर बात की गई। सीमा पर विकास परियोजनाओं को लेकर जयशंकर ने कहा, पिछले 9 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार, नॉर्दर्न फ्रंटियर क्षेत्र समेत सीमा ढांचे का उल्लेखनीय तौर से विकास कर रही है। 2014 के बाद चीन की तरफ से सीमा पर ढांचागत विकास की होड़ और गश्त बढ़ गई है। भारत इसे देखते हुए असम तक रेलवे कनेक्टिविटी के प्रयास कर रहा है।
भूटान और असम के बीच रेल लिंक पर चल रही बातचीत
विदेश मंत्री ने कहा, हम भी भूटान और असम के बीच रेल लिंक को लेकर बातचीत कर रहे हैं। भूटान पर्यटकों के लिए और अधिक पॉइंट्स खोलने को लेकर उत्सुक है।
भारत-बांग्लादेश-म्यांमार राजमार्ग पर कानून व्यवस्था चुनौती
भारत-बांग्लादेश-म्यांमार राजमार्ग को लेकर जयशंकर ने कहा, त्रिपक्षीय राजमार्ग पर कानून व व्यवस्था एक बड़ी चुनौती है। सड़क परियोजना को पूरा करने और इसे सितवे बंदरगाह से जोड़ने के लिए भारत की तरफ से म्यांमार के साथ बातचीत जारी है।