पश्चिम बंगाल के पूर्व उद्योग मंत्री और तृणमूल कांग्रेस के पूर्व महासचिव पार्थ चटर्जी प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। यह वहीं पार्थ चटर्जी हैं जिन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद तृणमूल का दूसरे नंबर का कद्दावर चेहरा माना जाता था। सार्वजनिक भाषणों से दूर रहने वाले, संगठनात्मक क्षमता के धनी, चटक रंग के चमकीले कुर्ते में शौकीन मिजाज के पार्थ चटर्जी को ममता बनर्जी बड़े भाई (पार्थ दा का संबोधन) का स्नेह देती थीं। हालांकि खाने-पीने, नाश्ते और बंगाली मिठाइयों के शौकीन पार्थ दा को मोटू कहकर चिढाने से भी नहीं चूकती थीं। तृणमूल कांग्रेस में ममता के कुछ करीबी भी पार्थ चटर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय का शिकंजा कसने से सकते में हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सादगी भरा जीवन जीती हैं। तांत वाली सफेद साड़ी, हवाई चप्पल, छोटी गाड़ी, सीमित सुख-सुविधाओं भरा जीवन और बड़े फख्र से कहती हैं कि वह किसी की मुफ्त की एक चाय भी पीने से परहेज करती हैं। उसी ममता बनर्जी के साथ तृणमूल के संस्थापक नेता मुकुल रॉय का नाम घोटालों में आया। पार्टी के कई नेता इसकी गिरफ्त में आए और अब पार्थ चटर्जी, उनकी करीबी अर्पिता मुखर्जी के घर से बड़े पैमाने पर नकदी, आभूषण, विदेशी मुद्रा की बरामदी हुई है। अर्पिता ने प्रवर्तन निदेशालय को पूछताछ में सभी पैसा पार्थ चटर्जी का होने की बात कही है। अर्पिता ने यह भी कहा है कि उन्हें तो अपने फ्लैट में जाने की इजाजत भी नहीं थी। वहां पार्थ और पार्थ के कुछ विश्वस्त लोग ही जाते थे। प्रवर्तन निदेशालय की जांच से मिल रहे संकेतों से पता चल रहा है कि पार्थ चटर्जी द्वारा डिजाइन प्रणाली के तहत रिश्वतखोरी होती थी। इस पैसे का अस्पतालों, कालेजों के माध्यम से शोधन (काला से सफेद) होता था और इसके बाद पैसे पार्थ चटर्जी के पास आ जाते थे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए पार्थ चटर्जी को बर्खास्त करना, तृणमूल में सभी पदों से हटाना आसान नहीं था। भतीजे अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के कई नेता इसी तरह की कार्रवाई के पक्ष में थे। मजूमदार समेत अन्य ने पार्थ के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव भी बना रखा था, लेकिन बताते हैं कि संवेदनशीलता को समझकर ममता बनर्जी ने थोड़ा इंतजार किया। सूत्र बताते हैं कि मुकुल राय समेत कुछ नेताओं से भी बात की। मित्रा से संपर्क किया। ममता बनर्जी को इसका पूरा अंदाजा है कि पार्थ चटर्जी के खिलाफ चल रही जांच के छींटे उनकी सफेद तांत की साड़ी पर आएंगे। हालांकि ममता बनर्जी के कुछ करीबियों का कहना है कि कम बोलने वाले, सार्वजनिक जीवन में भाषण संबोधन में रुचि न लेने वाले पार्थ चटर्जी के मन में क्या चल रहा है, इसे समझ पाना हमेशा से मुश्किल भरा रहा है। ममता बनर्जी उनपर पूरा भरोसा करती थी और इसका मुख्यमंत्री को गहरा झटका लगा होगा।
पार्थ चटर्जी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उम्र में दो साल बड़े हैं। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक दक्षिण कोलकाता के पार्थ राम कृष्ण मिशन विद्यालय से पढ़ाई की। भवानीपुर में आशुतोष कालेज से पढ़ाई की। ममता इसी के पास स्थित जोगमाया कालेज की छात्रा थीं। बाद में कोलकाता विश्वविद्यालय से एमए किया। एमबीए किया और अंग्रेजों द्वारा स्थापित कंपनी एंड्रू येलू के एचआर विभाग में काम करने लगे। कालेज के दिनों से ही पार्थ युवक कांग्रेस से जुड़े थे। सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार के सबसे युवा मंत्री सुब्रत मुखर्जी से प्रभावित थे। ममता बनर्जी से सी पुराने समय की जान पहचान ने उन्हें एंड्रू येलू से इस्तीफा देकर तृणमूल से जोड़ा। वह धीरे-धीरे ममता बनर्जी से नाराज होने के बाद पार्टी छोड़ने वाले नेताओं से खाली हुई जगह पर पहुंचते हुए राजनीतिक कद बढ़ाने लगे। 2001 में पहली बार विधायक बनने के बाद उनका रास्ता काफी आसान हो गया। इसके बाद वह चुनाव नहीं हारे। उनके बढ़ते कद का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वाम दलों की सरकार का दौर समाप्त होने से पहले पार्थ चटर्जी विधानसभा में पार्टी के उपनेता प्रतिपक्ष थे। 2017 में मुकुल रॉय के तृणमूल कांग्रेस छोडऩे के बाद पार्टी के महासचिव भी बन गए।
अभिनेत्री अर्पिता मुखर्जी पश्चिम बंगाल सरकार के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी हैं। पार्थ चटर्जी को लेकर पहले भी उनके कुछ विरोधी और करीबी तरह-तरह की कानाफूसी करते थे। इसमें महिलाओं से संबंध भी प्रमुखता से रहता था। पश्चिम बंगाल सरकार के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पार्थ चटर्जी भले शांत रहते थे, उन्हें अच्छे भाषणों के लिए नहीं जाना जाता था, लेकिन शौकीन मिजाज थे। 2017 में पार्थ चटर्जी की पत्नी बबली (जयश्री) चटर्जी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वह अपनी बेटी सोहिनी चटर्जी पर काफी निर्भर रहते थे। सोहिनी के बारे में कहा जाता है कि उनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रहती।
तृणमूल कांग्रेस छोड़कर विधानसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा में गए सुवेंदु अधिकारी इस समय अपनी पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और दबदबे वाले नेता। पूरी भाजपा तृणमूल कांग्रेस के मंत्री पार्थ चटर्जी का नाम आने के बाद उन्हें चोर...चोर कह रही है। ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के आरोप का दबाव बढ़ा दिया है। ममता बनर्जी ने खुद अपनी पहली प्रतिक्रिया में अपने नाम को लेकर हैरानी जताई थी। ममता का कहना था कि उनका किसी भ्रष्टाचार से दूर-दूर तक लेना-देना नहीं है। फिर उनका नाम क्यों घसीटा जा रहा है। जाहिर है ममता बनर्जी कुछ बैकफुट पर हैं। जबकि भाजपा इसे प्रचारित करने में पूरी तरह से जुटी हुई है।
प्रवर्तन निदेशालय लगातार अर्पिता मुखर्जी से पूछताछ कर रहा है। पार्थ चटर्जी से भी पूछताछ जारी है। पार्थ ने गिरफ्तारी होने तक ममता बनर्जी से संपर्क करने की हर संभव कोशिश की, लेकिन सूत्र बताते हैं कि सफल नहीं हो पाए। प्रवर्तन निदेशालय ने अब तक की छापेमारी में पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के आवास समेत अन्य स्थानों से पांच करोड़ रुपये से अधिक का नकद, 56 लाख रुपये के मूल्य की विदेशी मुद्रा और लगभग 50 करोड़ रुपये की भारतीय मुद्रा बरामद की है। अभी कुछ और ठिकानों की छापेमारी में कुछ और धनराशि होने की सूचना मिल सकती है।