केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भूस्खलन के कारण अपना घर गंवाने वाले लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। सीएम विजयन ने केरल सरकार की तरफ से बनावाए जा रहे घरों की नींव रखी। पिछले साल पहाड़ी जिले वायनाड के चूरलमाला-मुंडक्कई इलाकों में भूस्खलन के कारण लोग बड़ी संख्या में प्रभावित हुए थे। अब राज्य सरकार पीड़ितों के पुनर्वास के लिए मॉडल टाउनशिप बनवा रही है।
एक हजार स्क्वायरफीट के एक मंजिला मकान बनवाए जाएंगे
मॉडल टाउनशिप बनवाने के लिए राज्य सरकार ने कलपेट्टा के एल्स्टन एस्टेट में जमीन अधिग्रहण किया है। कलपेट्टा बाईपास के किनारे बन रही इस टाउनशिप के लिए 64 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। इस पर एक प्लॉट सात सेंट का होगा। एक हजार स्क्वायरफीट के एक मंजिला मकान बनवाए जाएंगे। आधारशिला रखे जाने के कार्यक्रम में वायनाड से निर्वाचित कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं।
मुख्यमंत्री का दावा- वायनाड में पुनर्वास के लिए केंद्र से कोई मदद नहीं मिली
वायनाड भूस्खलन के पीड़ितों का पुनर्वास करा रही केरल सरकार ने कहा है कि केंद्र सरकार से अब तक कोई मदद नहीं मिली है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने गुरुवार को टाउनशिप की आधारशिला रखने के बाद दावा किया कि पुनर्वास कार्य के लिए केंद्र ने केवल ऋण दिया है, वह राशि भी पर्याप्त नहीं है। केंद्र के साथ जैसे पिछले अनुभव रहे हैं, ऐसे में हम इससे अधिक की उम्मीद भी नहीं कर सकते। खबरों के मुताबिक भूस्खलन पीड़ितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने अपनी पूंजी निवेश योजना के तहत लगभग 529.50 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया है।
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वायनाड की तबाही में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी
गौरतलब है कि बीते साल 30 जुलाई को मुंदक्कई और चूरलमाला क्षेत्रों में हुए भूस्खलन के कारण दोनों इलाके पूरी तरह तबाह हो गए थे। इस तबाही में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि दर्जनों लोगों के घायल होने की खबरें भी सुर्खियों में रही थीं। हालात थोड़े बेहतर होने के बाद पीएम मोदी भी इलाके का जायजा लेने पहुंचे थे।
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केरल में भूस्खलन और जानमाल के नुकसान की वजह क्या है?
दरअसल, वायनाड में भूस्खलन की घटना कोई नई नहीं है। हां, इस बार घटना का असर व्यापक हुआ है। 8 अगस्त, 2019 को वायनाड के ही पुथुमाला इलाके में त्रासदी हुई थी। उस भूस्खलन की घटना में 17 लोगों की जान चली गई थी। करीब पांच साल बाद इसी तरह की एक घटना पास के मेप्पाडी में हुई है। भारी बारिश के दौरान वायनाड में कई जगहों पर भूस्खलन सक्रिय है, लेकिन ऐसी आपदा किसी ने नहीं सोची थी। भूस्खलन की दूसरी वजह भारी वर्षा और इलाके की प्रकृति को माना जा रहा है। अंग्रेजों के समय से ही इस क्षेत्र को निर्जन और भूस्खलन और भू-धंसाव की आशंका वाला माना जाता रहा है। पुराने समय में यहां कोई नहीं रहता था।
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