नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धा के इस युग में समुद्र में भारी बल प्रदान करने की भारतीय नौसेना की क्षमता भारत के दुश्मनों के खिलाफ एक विश्वसनीय निवारक है। हमने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका बखूबी प्रदर्शन किया। हमारी इकाइयों की त्वरित तैनाती और आक्रामक रुख ने पाकिस्तानी नौसेना को एक तरह से बंदी बना लिया और उन्हें हमसे गतिज कार्रवाई बंद करने का अनुरोध करने पर मजबूर कर दिया। कुछ दिन पहले आईएनएस विक्रांत के डेक से रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना को आश्वासन दिया था कि ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है और यदि फिर से आवश्यकता पड़ी, तो संभावना है कि इसकी शुरुआत भारतीय नौसेना द्वारा की जाएगी।
शिवालिक क्लास से बड़े और ज्यादा उन्नत
बता दें कि उदयगिरि को मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने बनाया गया है, जबकि हिमगिरि को कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने तैयार किया है। खास बात यह है कि उदयगिरि नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो का 100वां डिजाइन किया गया जहाज है। करीब 6700 टन वजनी ये जहाज शिवालिक क्लास से बड़े और ज्यादा उन्नत हैं।
इनका डिजाइन ऐसा है कि ये रडार को चकमा देने में सक्षम हैं। इनमें डीजल इंजन और गैस टर्बाइन दोनों लगे हैं, आधुनिक मिसाइलें, तोप और पनडुब्बी रोधी हथियार भी हैं। दोनों भारतीय नौसेना के नेक्स्ट-जनरेशन स्टील्थ वॉरशिप हैं, जो प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए हैं। इन युद्धपोत के निर्माण में 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिससे 4,000 से ज्यादा लोगों को सीधी और 10,000 से ज्यादा को अप्रत्यक्ष नौकरियां मिलीं।
'उदयगिरि' और 'हिमगिरि' का जलावतरण जहाज डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता के प्रति नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नौसेना इसके बाद अन्य स्वदेशी पोतों जैसे विध्वंसक आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि, पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर, एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट आईएनएस अर्नाला और डाइविंग सपोर्ट वेसल आईएनएस निस्तार का जलावतरण 2025 में करेगी।
स्टील्थ, हथियार और सेंसर प्रणालियों से हैं लैसः
उदयगिरि और हिमगिरि, प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक ) श्रेणी के फ्रिगेट के अनुवर्ती जहाज हैं। इन दोनों जहाजों में डिजाइन, स्टेल्थ, हथियार और सेंसर प्रणालियों में महत्वपूर्ण सुधार शामिल हैं। उदयगिरि को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने तैयार किया है जबकि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने हिमगिरि का निर्माण किया है।