देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पश्चिम बंगाल के बुर्दवान में लगी प्रतिमा पर अज्ञात लोगों ने काली स्हायी फेंक दी थी। जिसके बाद कटवा नगर पालिका ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली नगर पालिका ने शिकायत में किसी का नाम नहीं लिया है। वहीं नागरिक निकाय के अध्यक्ष रबिंद्रनाथ चैटर्जी, जो इस क्षेत्र से कांग्रेस के पूर्व विधायक रह चुके हैं, उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे भाजपा का हाथ हो सकता है।
चैटर्जी के आरोप के बाद स्थानीय भाजपा नेता कृष्णा घोष ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए ममाले की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि हमारे बीच बेशक राजनीतिक भेदभाव हैं लेकिन हमारी पार्टी का कोई भी सदस्य इस तरह के काम नहीं कर सकता है। कांग्रेस ने इस घटना को बहुत बड़ी शर्म की बात करार दिया है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मांग की है। पश्चिम बंगाल के प्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य अनिल सिकारिया ने कहा- जिसने भी यह अपराध किया है उसे पकड़कर सजा देनी चाहिए। यह बहुत बड़ी शर्म का मामला है।
घटना के बाद कांग्रेस समर्थकों ने शहर में प्रदर्शन किया और स्थानीय उप-विभागीय अधिकारी को विज्ञप्ति सौंपते हुए इस मामले की जांच करने और अपराधियों को सजा देने की मांग की। नेहरू की प्रतिमा पर हमला मूर्तियों पर होने वाले हमलों की श्रृंखला में सबसे नया है। मूर्ति पर हमले की शुरुआत त्रिपुरा में कम्युनिस्ट नेता
व्लादिमीर लेनिन की प्रतिमा को गिराने के बाद हुई थी। लेनिन की मूर्ति पर हमला भाजपा द्वारा राज्य में विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद किया गया था। सोशल मीडिया पर इस मामले पर खूब चर्चा भी हुई थी। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में कई विचारधाराओं की समर्थित विभूतियों की और राजनेताओं की मूर्तियों को तोड़ने और स्याही फेंके जाने का सिलसिला शुरू हो गया था।