अल्पसंख्यक और संसदीय मामलों के मंत्री किरण रिजिजू को भरोसा है कि दो अप्रैल को 12 बजे संसद में वक्फ संशोधन बिल पेश होगा और सदन में पारित होगा। किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार बिल के मसौदे पर व्यापक चर्चा चाहती है। हालांकि उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्ष चर्चा से बचने के लिए वॉकआउट का सहारा ले रहा है। वक्फ बिल को सदन में पेश किए जाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने खेमेबंदी के साथ साथ रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है।
भाजपा ने अपने सांसदों को अगले तीन दिन तक सदन में मौजूद रहने की हिदायत देते हुए व्हिप जारी किया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने भी व्हिप जारी किया है। रिजिजू कहते हैं कि विपक्ष का मकसद केवल हंगामा करना है। वह चर्चा में हिस्सा लेने से भाग रहे हैं। वक्फ बिल पर चर्चा के लिए लोकसभा में आठ घंटे का समय प्रस्तावित है। लोकसभा की सुबह हुई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (कार्य मंत्रणा समिति) की बैठक के दौरान विपक्ष ने चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की थी। पहले सरकार इस पर छह घंटे की चर्चा की मांग चाहती थी, जबकि विपक्ष 12 घंटे की चर्चा चाहता था। विपक्ष इस बैठक में अपना पक्ष रखा और इसके बाद बिजनेस एडवाइजरी कमेटी से वॉकआउट कर गया। रिजिजू ने इस पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि चर्चा के लिए कुछ नहीं है तो बहाना न बनाइए। लोकसभा से पारित होने के बाद यह विधेयक राज्यसभा में आएगा। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री का कहना है कि सरकार बिल पर चर्चा चाहती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर संसद के सत्र को आगे बढ़ाया जाएगा। रिजिजू के मुताबिक लोकसभा में चर्चा के बाद राज्यसभा में भी व्यापक चर्चा के लिए समय चाहिए। जबकि संसद का मौजूदा सत्र चार अप्रैल तक ही प्रस्तावित है।
सरकार पिछले दो सप्ताह से कर रही है तैयारी
केंद्र सरकार के अधीन प्रेस सूचना ब्यूरो के प्रधान महानिदेशक से लेकर विभिन्न मंत्रालयों का अमला पिछले दो सप्ताह से वक्फ बिल पर आम राय बनाने में जुटा है। विभिन्न समाचार पत्रों, माध्यमों में इसको लेकर लगातार प्रचार-प्रसार जारी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने मार्च के तीसरे सप्ताह में ही वक्फ बिल को संसद के इसी सत्र में पेश किए जाने की सूचना दी थी। कानून मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की थी। बताते चलें इस तरह की संभावना विपक्ष के राजनीतिक दलों को भी दिखाई दे रही थी। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे खुद वक्फ बिल को लेकर लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।
ये भी पढ़ें: सरकार को क्यों पड़ी वक्फ संशोधन बिल लाने की जरूरत, देश में कितनी वक्फ संपत्तियां, इन पर क्या शिकायतें?
एनडीए के घटक दलों में रणनीति के स्तर पर नहीं है कोई विरोध
वक्फ बिल को लेकर सरकार के घटक दल जद(यू) और टीडीपी के मुंह फुलाने की संभावना थी, लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों ने इन दोनों सहयोगी दलों को साध लिया है। जद(यू) के कोटे से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन(ललन सिंह) ने कहा कि उनकी पार्टी वक्फ बिल को लेकर अपना रुख सदन को बताएगी। ललन सिंह ने इसको लेकर गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर उनसे चर्चा की। गृहमंत्री को जद(यू) की चिंताओं से अवगत कराया। वहीं सांसद संजय झा ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं। वहां अल्पसंख्यकों के हित में उनकी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक कोई पहली बार संसद में नहीं पेश हो रहा है। पहले भी आया है। जद(यू) के अलावा भाजपा ने एनडीए के घटक दल टीडीपी से भी रणनीतिक समर्थन की तैयारी पूरी कर ली है। टीडीपी के नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इसे समर्थन देने की मंशा से भाजपा के नेताओं को अवगत करा दिया है।
विपक्ष करेगा हंगामा और वक्फ संशोधन बिल का विरोध
विधेयक को लेकर कांग्रेस पार्टी का एजेंडा साफ है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी का मानना है कि वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में पेश करने के पीछे केंद्र सरकार की मंशा ठीक नहीं है। कांग्रेस के इस रुख से उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी, बिहार का राष्ट्रीय जनता दल भी इत्तेफाक रखता है। वक्फ संशोधन बिल को लेकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एक खास धर्म को निशाना बनाए जाने की नीयत से लाया जाने वाला बिल बताया। लोकसभा में एनसी के दो सांसद हैं। अब्दुल्ला का स्टैंड साफ है कि उनके सांसद लोकसभा में इसका विरोध करेंगे। एआईएमआईएम के ओवैसी पहले से इसके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं।
ये भी पढ़ें: भाजपा और कांग्रेस ने सांसदों के लिए जारी किया व्हिप, 2 अप्रैल को संसद में उपस्थित रहने के निर्देश
लोकसभा में हो जाएगा पारित और राज्यसभा में होगी तीखी बहस
वक्फ संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष पूरी जोर आजमाइश करेंगे। जिस तरह के समीकरण बन रहे हैं, उसमें वक्फ संशोधन विधेयक के लोकसभा में आसानी से पारित हो जाने की संभावना है। घटक दल जद(यू) और टीडीपी के साथ आने के बाद सत्ता पक्ष को इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी। लोकसभा की सदस्य संख्या के अनुसार इंडिया गठबंधन के सदस्यों की संख्या 235 है। जबकि भाजपा के 240 और एनडीए के कुल सदस्यों की संख्या 293 है। पांच निर्दलीय सांसद भी हैं और 9 सांसद ऐसे हैं जो न तो एनडीए से हैं और न इंडिया गठबंधन से। ऐसे में एनडीए सरकार ठीकठाक संख्या बल जुटा लेगी।
राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं। इसमें भाजपा के 98 और एनडीए के 115 सदस्य हैं। 06 सदस्य मनोनीत होने वाले कोटे से हैं। राज्यसभा में सरकार को 119 सांसदों का मत चाहिए। जबकि विपक्ष के खेमे में कांग्रेस के 27 और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के 58 सांसद हैं। जनता दल(बीजू) के सात, वाईएसआर कांग्रेस के 9, एआईएडीएमके के 4 सांसद हैं। निर्दल और छोटे दल को मिलाकर 3 अन्य सांसद है। समझा जा रहा है कि सत्ता पक्ष को यहां भी कोई दिक्कत नहीं आएगी।
संबंधित वीडियो