अमेरिका के उप वित्त मंत्री वैली एडेमो
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अमेरिकी उप-वित्तमंत्री वैली एडेमो ने भारत की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से मुलाकात कर वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने खाद्य असुरक्षा, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और यूक्रेन संकट तथा आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर बातचीत की।
वैली एडेमो ने नई दिल्ली में सीतारमण के अलावा पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा, वित्त सचिव अजय सेठ, विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा और पेट्रोलियम व प्राकृतिक कैस सचिव पंकज जैन से शुक्रवार को मुलाकात की थी। बैठकों में एडेमो ने उन तरीकों पर भी चर्चा की जिनसे भारत-अमेरिका मिलकर खाद्य असुरक्षा, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए काम कर सकते हैं। उन्होंने इन मुद्दों के हल के लिए यूक्रेन पर रूसी हमले को खत्म करने पर जोर दिया। बैठक में भारत-अमेरिका और विश्व में उपभोक्ताओं तथा व्यवसाय के लिए ऊर्जा कीमतें घटाने पर अमेरिका का दृष्टिकोण भी साझा किया गया। अडेमो ने क्वाड तथा हिंद-प्रशांत आर्थिक ढांचे जैसे मंचों के जरिये दोनों देशों के रिश्ते और प्रगाढ़ करने पर जोर दिया।
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाएंगे
इस अहम बातचीत में अच्छी आपूर्ति वाले वैश्विक ऊर्जा बाजारों के महत्व को दोहराया गया। अमेरिका ने भरोसा जताया कि भारत जैसे भागीदारों के साथ मिलकर अक्षय ऊर्जा के स्रोतों तक पहुंच का विस्तार कर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाई जा सकेगी।
रूसी तेल पर मूल्य कैप की मांग
इस मुलाकात में भारत पर रूस के खिलाफ बन रहे गठबंधन में शामिल होने के लिए दबाव भी डाला गया। इसके लिए वैश्विक ऊर्जा की कीमतों को नरम करने के लिए रूसी तेल पर मूल्य कैप लगाने की मांग की गई। बता दें, भारत ने रूस से रियायती तेल हासिल किया है। जबकि यूरोप व अन्य खरीदारों ने यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद इसे छोड़ दिया। इस युद्ध को लेकर रूस की सीधी आलोचना में भी भारत ने सुरक्षित रुख अपनाया है।
क्वाड व हिंद-प्रशांत गठबंधन गहराने पर जोर
नई दिल्ली में बैठकों के दौरान अमेरिकी उप-वित्तमंत्री ने क्वाड और हिंद-प्रशांत आर्थिक फ्रेमवर्क जैसे प्लेटफॉर्मों के जरिये भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा करने पर जोर दिया। एडेमो ने कहा, दोनों देश खुले व स्वतंत्र हिंद-प्रशांत को बनाए रख सकते हैं। इससे नागरिकों के लिए अधिक समृद्धि के दरवाजे खुलेंगे। बता दें, क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के खिलाफ वैश्विक ताकतें लगातार एकजुट हो रही हैं।