केंद्र और राज्य सरकारें अभी यह स्वीकार नहीं कर रही हैं कि देश में कोरोना की सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई और दिल्ली में जिस प्रकार से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और बहुत सारे मामलों में संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल रहा है, वह इस बात का संकेत है कि देश में सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है।
तकनीकी भाषा में सामुदायिक संक्रमण उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें किसी संक्रामक रोग के फैलने का वाहक समाज के ही लोग बनने लगते हैं। यानी आसपास रहने वाले लोग अनजाने में ही एक दूसरे को संक्रमित करने लगते हैं। ऐसी स्थिति आने पर संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे मामलों में कई बार संक्रमण के पीछे की कड़ी खोजना भी मुश्किल होता है।
जब सामुदायिक संक्रमण तेजी से फैलने लगता है और समाज के 60 फीसदी या इससे अधिक लोगों को संक्रमित कर देती है तब लोगों में उस बीमारी के प्रतिरोध की क्षमता पैदा हो जाती है। इसे ही हर्ड इम्युनिटी कहा जाता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि हर्ड इम्युनिटी आने पर लोगों में रोगनाशक एंटीबॉडी तत्वों का निर्माण हो जाता है। ऐसे लोगों के संपर्क में आने से वायरस खत्म या निष्क्रिय हो जाता है। वायरस के धीरे-धीरे नष्ट होने से इसके संक्रमण की दर घटने लगती है और यह अन्य स्वस्थ लोगों को बीमार नहीं बना पाता है।