उन्होंने कहा कि इस प्रोग्राम के माध्यम से मल्टी-डायमेंशनल और मल्टी-सेक्टोरल विकास की कल्पना के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने, संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन, पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन और हर तरह से गाँव के जीवन को वाइब्रेंट बनाने के प्रयास हुए हैं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों, वीवीपी में शामिल गांवों के जिला कलेक्टरों और सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की जिम्मेदारी है कि वे वीवीपी तक सीमित नहीं रहें और इस कार्यक्रम के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए यह विचार करें कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम से आगे बढ़कर और क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं। वीवीपी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह आवश्यक है कि भारत सरकार और राज्य सरकारों के सभी विभाग मिलकर इन सीमावर्ती गांवों को सच्चे अर्थों में सुरक्षा का महत्वपूर्ण उपकरण बनाएं।
अमित शाह ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम की संकल्पना को चरितार्थ करने के लिए सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत सैचुरेशन, पर्यटन के लिए आवश्यक जनसुविधाओं को बढ़ावा और सहकारी संस्थाओं को प्रोत्साहित कर रोजगार सृजन जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर होमस्टे जैसे प्रयोगों को सीमावर्ती गांवों तक ले जाएँ और इनमें बुकिंग के लिए राज्यों के पर्यटन विभाग उचित व्यवस्था करें तो सीमांत गांवों के हर घर में रोजगार होगा। शाह ने कहा कि राज्यों के ग्रामीण विकास विभाग को इन गांवों का गौरव स्थापित करने की दिशा में प्रयास करना होगा और इसमें जिला कलेक्टरों की अहम भूमिका है। अगर गांवों में सभी सुविधाएं और रोजगार हों तो स्थानीय लोगों में गाँव छोड़ कर जाने की इच्छा कभी नहीं होगी। गृह मंत्री ने कहा कि युवा कलेक्टरों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विषम भौगोलिक परिस्थिति के बावजूद हमारे नागरिक अपना गाँव नहीं छोड़ें, पलायन न हो और गाँव की आबादी में वृद्धि भी हो।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम लागू करने के बाद कई सीमावर्ती गांवों में आबादी बढ़ी है। यह हमारे देश के सभी सीमांत गांव के लिए एक संदेश है कि फिर से आबादी बढ़ने का हमारा यह ट्रेंड सही रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि डेमोग्राफिक बदलाव हमारे लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम में शामिल जिलों के कलेक्टरों को इस मुद्दे को गंभीरता और बारीकी से देखना होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में डेमोग्राफिक बदलाव सीधे तौर पर देश और सीमाओं की सुरक्षा को प्रभावित करता है। गृह मंत्री ने कहा कि यह नहीं मानना चाहिए कि यह भौगोलिक स्थिति के कारण हो रहा है, बल्कि यह एक निश्चित डिजाइन के तहत हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्यों के मुख्य सचिवों और सीएपीएफ को भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है।
अमित शाह ने कहा कि योजनाओं के शत-प्रतिशत सैचुरेशन के लिए जिला कलेक्टरों को यह विचार करना चाहिए कि क्या वे इसमें केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के साथ समन्वय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल स्वास्थ्य, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में मदद प्रदान कर सकते हैं। श्री शाह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में आईटीबीपी ने रोजमर्रा की चीजें, जैसे - दूध, सब्जी, अंडे, अनाज आदि वाइब्रेंट गांव से ही खरीदने का सफल प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि हर सीमांत गांव में इस प्रयोग को जमीन पर उतारने की जरूरत है। शाह ने यह भी कहा कि सीमा पर तैनात सेना भी गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से समन्वय कर वाइब्रेंट गांव में रोजगार सृजन की जिम्मेदारी ले।
गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी है कि वे डेयरी कॉपरेटिव बनाकर सीएपीएफ और सेना के दूध की जरुरत को गांव से ही पूरा करे। इससे रोजगार सृजन में सहायता मिलेगी। इस प्रयोग को प्रभावी मॉडल के तौर पर विकसित कर हर वाइब्रेंट विलेज में लागू करने का काम गृह मंत्रालय, सभी केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, रक्षा मंत्रालय के माध्यम से सेना और जिला कलेक्टरो को हाथ में लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजगार के सृजन से पलायन अपने आप रुकेगा।