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Vice President Polls: उपराष्ट्रपति चुनावों में क्यों नहीं होता ईवीएम का इस्तेमाल; कैसे होती है वोटों की गिनती?

Tue, 09 Sep 2025 07:09 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उपराष्ट्रपति पद की चुनाव प्रक्रिया में क्या-क्या होता है? इस चुनाव में ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल क्यों नहीं होता? चुनाव अधिकारी इसके पीछे क्या तर्क देता है?आइये जानते हैं…
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नए उपराष्ट्रपति का चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश में कोई भी चुनाव हो, उससे पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की खूब चर्चा होती है। भले ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ईवीएम की अहम भूमिका रहती हो, और इसके जरिए नेताओं की किस्मत का फैसला होता है, लेकिन कई ऐसे भी चुनाव होते हैं जहां ईवीएम का इस्तेमाल नहीं  होता है। इन चुनावों में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे अहम पद का भी चुनाव शामिल है। अब जबकि आज देश का नया उपराष्ट्रपति चुना जाना है, तो ऐसे में यह जानना जरूरी है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान की प्रक्रिया क्या है और आखिर क्यों इस चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जाता.... 

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सबसे पहले जानते हैं क्या है ईवीएम? 
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन या ईवीएम एक ऐसी तकनीक पर आधारित हैं जहां वह लोकसभा और राज्य विधानसभाओं जैसे प्रत्यक्ष चुनावों में मतों के एग्रीगेटर के रूप में काम करती हैं। मतदाता ईवीएम पर अपनी पसंद के उम्मीदवार के आगे का बटन दबाते हैं और जो सबसे अधिक वोट हासिल करता है, उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।  
 

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में क्यों नहीं होता ईवीएम का इस्तेमाल?
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका निभाती है। इसके जरिए करोड़ों मतदाताओं की पसंद को सुरक्षित व तेजी से गिनने का काम होता है, लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में इसका इस्तेमाल नहीं होता। वजह है इस चुनाव की  प्रक्रिया, जहां राज्यसभा और लोकसभा के सांसद वोट डालते हैं और वह भी अनुपातिक मूल्यांकन और वरीयता आधारित प्रणाली से। यही कारण है कि यहां मतपत्र का ही सहारा लिया जाता है। उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान के दौरान हर मतदाता को उम्मीदवारों के नाम के सामने 1, 2, 3, 4 जैसी प्राथमिकताएं अंकित करनी पड़ती हैं। वोटों की गिनती इन प्राथमिकताओं के आधार पर होती है, जो ईवीएम की मौजूदा तकनीक से संभव नहीं है।  

ईवीएम का प्रयोग न करने के पीछे चुनाव अधिकारी क्या तर्क देते हैं? 
उपराष्ट्रपति पद के चुनावों नें ईवीएम का प्रयोग न किए जाने के पीछे का कारण बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि ईवीएम को चुनाव की इस प्रणाली के लिए नहीं बनाया गया है। ईवीएम मतों की वाहक हैं जबकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत इसको वरीयता के आधार पर मतों की गिनती करनी होगी। इसके लिए ईवीएम में अलग तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। यानी ऐसे चुनाव के लिए एक अलग तरह की ईवीएम की दरकार होगी।यही कारण है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। 


उपराष्ट्रपति चुनाव में कौन वोट डालता है?
उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा के 233 निर्वाचित सांसद, राज्यसभा में मनोनीत 12 सांसद और लोकसभा के 543 सांसद वोट डाल सकते हैं। इस तरह के कुल 788 लोग वोट डाल सकते हैं। हालांकि, चुनाव आयोग जब उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का एलान करेगा, तब वह लोकसभा और राज्यसभा में सभी मौजूदा सदस्यों की गिनती करेगा।


 

संविधान के अनुच्छेद 66 में बताई गई है उपराष्ट्रपति चुनाव में की पूरी प्रक्रिया
संविधान के अनुच्छेद 66 में उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया का जिक्र है। यह चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधि पद्धति से किया जाता है, जो कि लोकसभा या विधानसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया से बिल्कुल अलग है। उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग सिंगल ट्रांसफरेबल वोट सिस्टम से होती है। आसान शब्दों में इस चुनाव के मतदाता को वरीयता के आधार पर वोट देना होता है। मसलन वह बैलट पेपर पर मौजूद उम्मीदवारों में अपनी पहली पसंद के उम्मीदवार को एक, दूसरी पसंद को दो और इसी तरह से अन्य प्रत्याशियों के आगे अपनी प्राथमिकता नंबर के तौर पर लिखता है। ये पूरी प्रक्रिया गुप्त मतदान पद्धति से होती है। मतदाता को अपनी वरीयता सिर्फ रोमन अंक के रूप में लिखनी होती है। इसे लिखने के लिए भी चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए खास पेन का इस्तेमाल करना होता है। 

इसके बाद जो उम्मीदवार रेस से बाहर होता है उसे पहली प्राथमिकता देने वाले वोटों में यह देखा जाता है कि दूसरी प्राथमिकता किसे दी गई है। फिर दूसरी प्राथमिकता वाले ये वोट अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इन वोटों के मिल जाने से अगर किसी उम्मीदवार के मत कोटे वाली संख्या के बराबर या ज्यादा हो जाएं तो उस उम्मीदवार को विजयी घोषित कर दिया जाता है। 

अगर दूसरे राउंड के अंत में भी कोई उम्मीदवार न चुना जाए तो प्रक्रिया जारी रहती है। सबसे कम वोट पाने वाले कैंडिडेट को बाहर कर दिया जाता है। उसे पहली प्राथमिकता देने वाले बैलट पेपर्स और उसे दूसरी काउंटिंग के दौरान मिले बैलट पेपर्स की फिर से जांच की जाती है और देखा जाता है कि उनमें अगली प्राथमिकता किसे दी गई है। 

फिर उस प्राथमिकता को संबंधित उम्मीदवारों को ट्रांसफर किया जाता है। यह प्रक्रिया जारी रहती है और सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को तब तक बाहर किया जाता रहेगा जब तक किसी एक उम्मीदवार को मिलने वाले वोटों की संख्या कोटे के बराबर न हो जाए।
 
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उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्णन और बी. सुदर्शन रेड्डी के बीच मुकाबला - फोटो : Amar Ujala
आज चुना जाएगा देश का नया उपराष्ट्रपति
आज देश के नए उपराष्ट्रपति के नाम का एलान हो जाएगा। जगदीप धनखड़ के अचानक स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए 21 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था, जिस कारण रिक्त हुए उपराष्ट्रपति पद के लिए मध्यावधि चुनाव कराया जा रहा है। अब आज यानी नौ सितंबर को यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी सी. पी. राधाकृष्णन और विपक्ष के बी सुदर्शन रेड्डी के बीच सीधा मुकाबला है। 

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