उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि "संगठनों से खतरे निकल रहे हैं", जिसमें कुछ विदेशी विश्वविद्यालय देश की सभ्यता लोकाचार को ध्वस्त करने और इसके विकास को प्रभावित करने के लिए विध्वंसक भारत विरोधी गतिविधियों के केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में तथाकथित अभिजात वर्ग के छिपे हुए एजेंडे में परेशान करने वाली अंतर्दृष्टि खतरनाक है और दुर्भाग्य से यह हमारे संवैधानिक संस्थान के कामकाज में दिखाई दे रहा है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह संसद की जिम्मेदारी है कि वह आंतरिक या बाहरी किसी भी प्रकार के खतरों से भारत की राष्ट्रीय संप्रभुता और सांस्कृतिक अखंडता की रक्षा करे। 16वें सिविल सेवा दिवस के उद्घाटन समारोह में धनखड़ ने कहा कि अभूतपूर्व विकास और वैभव की राह पर चल रहे हमारे लोकतंत्र को जरूरत है कि उसके पंख - विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका सुचारू रूप से ऊपर की उड़ान के लिए मिलकर काम करें। हम सभी को यह सुनिश्चित करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये संवैधानिक संस्थाएं दूसरे के क्षेत्र में घुसपैठ करके सत्ता को हथियार बनाने का जोखिम नहीं उठा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका अपने संबंधित क्षेत्र में काम करते हुए ही सबसे अच्छी सेवा करती हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा, हमारी सभ्यता के लोकाचार को ध्वस्त करने और हमारे विकास को रोकने के लिए भारत विरोधी विध्वंसक गतिविधियों के केंद्र के रूप में काम करने वाले कुछ विदेशी विश्वविद्यालयों सहित, भीतरी और बाहरी संगठनों से खतरे पैदा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद अकेले "कानून बनाने की प्रभारी" है और इसे लागू करने में सक्षम है। धनखड़ ने कहा कि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है, जो बड़े पैमाने पर लोगों की इच्छा का सबसे प्रामाणिक प्रतिबिंब है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए धनखड़ ने कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं जो भारत के अभूतपूर्व विकास और फलते-फूलते लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति शुतुरमुर्ग का रुख अपनाते हैं। ऐसे लोगों को सहन करना वाकई दर्दनाक है। उन्होंने कहा, देश के अंदर और बाहर वे हमारे लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थानों को नीचा दिखाने, निंदा करने, कलंकित करने के दुस्साहस में लगे रहते हैं। यह चौंकाने वाला है कि जब आर्थिक विकास, नीति-निर्माण और क्रियान्वयन की बात आती है तो हममें से कुछ क्यों आनंदपूर्वक अपन लक्ष्यों का सहारा लेते हैं। इस नुकसानदेह रुख को समाप्त करने की जरूरत है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र और लोकतंत्र की जननी है एवं सभी स्तरों पर गांव, नगर पालिकाओं, राज्यों और केंद्र में यह सबसे कार्यात्मक और जीवंत है। उन्होंने कहा, किसी भी अन्य देश के संविधान में आपको पंचायतों, नगर पालिकाओं के लिए प्रावधान नहीं मिलेगा। हमारे संविधान के नौवें भाग में यह है। इस तरह का पदानुक्रमित लोकतांत्रिक तंत्र दुनिया में कहीं और नहीं है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हमारा स्तर किसी के पास नहीं है...।
केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह, कैबिनेट सचिव राजीव गाबा और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग के सचिव वी श्रीनिवास ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।