पूर्वी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में चुनाव दरअसल ग्लैमर, विकास और सुलभता के बीच है। चार सालों में दिल्ली सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में जो कुछ भी हासिल किया है उसमें आप प्रत्याशी आतिशी की अहम भूमिका थी। वे शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार थीं। वहीं, कांग्रेस प्रत्याशी अरविंदर सिंह लवली कई बार विधायक रहे, दिल्ली सरकार में मंत्री भी रहे और जनता के लिए हमेशा मौजूद रहते हैं। भाजपा ने अंतिम समय में पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गौतम गंभीर को उतारकर लड़ाई को नया मोड़ दे दिया।
जहां लवली और आतिशी क्षेत्र के विकास के मुद्दों को उठा रहे हैं, वहीं गंभीर के लिए सबसे बड़ा मुद्दा राष्ट्रवाद का है। वे काफी समय पहले से ही सोशल मीडिया के माध्यम से देशप्रेम, सेना, पाकिस्तान और देशभक्ति जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखते रहे हैं। अपने जनसंपर्क के दौरान उनका सबसे ज्यादा जोर इन्हीं मुद्दों पर है। सेलिब्रिटी होने के चलते गंभीर के रोड शो में जबरदस्त भीड़ जुट रही है। ऑटो चालक दिनेश दुबे कहते हैं - हमें तो यही लगता है कि दिल्ली के लिए आप ठीक है और केंद्र के लिए भाजपा। वहीं गांधीनगर निवासी शफीक अहमद कहते हैं कि लवली मिलनसार हैं, सर्वसुलभ है।
पूर्वी दिल्ली में जहां विवेक विहार, प्रीत विहार, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और निजामुद्दीन ईस्ट उच्च वर्गीय लोगों के रिहायशी इलाके हैं तो त्रिलोकपुरी, कल्याणपुरी, घोंडा जैसे इलाके जिनमें कई गैरकानूनी झुग्गी झोपड़ी बस्तियां हैं। लक्ष्मी नगर में चार्टर्ड अकाउंटेंट संजय गुप्ता कहते हैं पिछले तीन दिनों के दौरान हमारे इलाके में तीनों उम्मीदवार प्रचार करने आए। जहां आतिशी के साथ मुट्ठीभर लोग थे वहीं गंभीर के जुलूस में इतनी भीड़ थी कि धक्का-मुक्की के बीच में अपना भाषण ही पूरा नहीं कर पाए।
पिछले चुनाव में भाजपा ने तीन बार जीते हुए सांसद लाल बिहारी तिवारी का टिकट काट कर श्रीश्री रवि शंकर के शिष्य रहे महेश गिरि को दिया था। शीला दीक्षित के बेटे व तत्कालीन सांसद संदीप दीक्षित और पत्रकार आम आदमी पार्टी के राजमोहन गांधी के खिलाफ गिरि की जीत का मुख्य कारण गैर-भाजपा वोटों का बंटवारा रहा। तब गांधी और दीक्षित के वोट मिलकर गिरि के वोटों से ज्यादा रहे।
आतिशी को उपलब्धियों का सहारा
यूपी और बिहार के लोगों को लुभाने के लिए आतिशी छठ के लिए घाटों की संख्या 45 से बढ़ाकर 300 कर देने को बड़ी उपलब्धि बताती हैं। सरकारी स्कूलों की कायापलट, 10वीं-12वीं का रिजल्ट बेहतर होना, मोहल्ला क्लीनिक के जरिए अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रचार का मुख्य हिस्सा है।
गैर-भाजपा वोटों के बंटवारे से गंभीर का पलड़ा भारी
इस चुनाव में गैर-भाजपा का वोट बंटने से फिलहाल गंभीर का पलड़ा भारी नजर आता है। गंभीर अपनी छवि से भी सभी लोगों में लोकप्रिय नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के लिए सबसे बड़े संतोष की बात यही है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में उसका वोट बैंक जहां 9 प्रतिशत पर आ गया था, वह एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ी होती दिखाई दे रही है। आप और कांग्रेस का वोट बैंक लगभग एक ही है इसलिए यदि कांग्रेस बढ़ती है तो नुकसान आप को ही होगा।