ब्रिक्स समिट के लिए भारत पहुंचे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जर्मनी में एएफडी की जीत और यूरोप संकट को पश्चिम की नीतिगत गलतियों का परिणाम बताया। उन्होंने यूरोपीय देशों को रूस से खतरे की धारणा खारिज करते हुए कहा कि मॉस्को का यूरोप के साथ टकराव का कोई कारण नहीं है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें ब्रिक्स समिट के लिए भारत पहुंचे हैं। यहां उन्होंने जर्मनी के सैक्सोनी-अनहाल्ट राज्य के चुनावों में 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) पार्टी की जीत और यूरोप के मौजूदा हालात पर अपनी राय रखी है। दिल्ली में दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि आज पूरे यूरोप में जो कुछ भी घट रहा है, वह पश्चिमी देशों और उनकी व्यवस्थागत गलतियों का परिणाम है। पुतिन ने कहा कि पश्चिमी ताकतों ने राजनीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर गंभीर गलतियां की हैं।
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पुतिन ने आगे कहा कि गलतियां हर किसी से होती हैं। खुद रूस से भी अतीत में काफी गलतियां हुई हैं और बाकी दुनिया ने भी गलतियां की हैं। लेकिन पश्चिमी देशों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह रही कि शीत युद्ध की समाप्ति और सोवियत संघ के विघटन के बाद वे खुद को 'ओलंपस के शिखर' पर बैठा समझने लगे। उन्हें ऐसा लगने लगा कि उन्हें सब कुछ करने की पूरी छूट है, और वे ऐसे लोग हैं जो कभी कोई गलती कर ही नहीं सकते।
रूस से यूरोपीय देशों को कोई खतरा नहीं
यूरोपीय देशों को रूस से खतरे के मुद्दे पर पुतिन ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि ऐसा कोई खतरा न तो पहले कभी था और न ही आज मौजूद है। रूस न तो यूरोपीय देशों को कोई धमकी दे रहा है और न ही भविष्य में उन्हें डराने का उसका कोई इरादा है। पुतिन ने सवाल किया कि आखिर रूस ऐसा करेगा ही क्यों? कोई इस हकीकत पर गौर ही नहीं करता कि यूरोप के साथ किसी भी टकराव या विवाद की रूस के पास कोई वजह ही नहीं है।
पुतिन ने याद दिलाया कि सभी जरूरी मुद्दों का समाधान दूसरे विश्व युद्ध के नतीजों के साथ ही तय हो गया था। इसके बाद सोवियत संघ के टूटने पर जो कुछ भी हुआ, वह सोवियत संघ के कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में रूसी संघ की आपसी सहमति से किया गया था। उन्होंने साफ किया कि उन तय व्यवस्थाओं के खिलाफ जाने वाला हर कदम सीधे तौर पर रूस के हितों के खिलाफ है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों व संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के चार्टर के भी पूरी तरह खिलाफ है।