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15 गोली लगने के बाद दुश्मन के बंकर पर टूट पड़ा भारत माता का ये सपूत

Tue, 26 Jul 2016 07:42 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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रहीवीके सिंह - फोटो : pti
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17 साल पहले आज ही के दिन हमारे सशस्त्र बलों ने जान की बाजी लगाकर पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक युद्ध जीता था। अपनी जान कुर्बान कर देने वाले इन वीर शहीदों को आज जब पूरा देश श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है तो मोदी सरकार में मंत्री और आर्मी चीफ रहे वीके सिंह ने भी फेसबुक पर अपने एक साथी की बहादुरी को याद किया है। इसमें उन्होंने परमवीर चक्र विजेता ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के अदम्य साहस और बहादुरी को याद करते हुए उन्हें सैल्यूट किया है। वीके सिंह की यह फेसबुक पोस्ट वायरल हो रही है। 
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वीके सिंह ने लिखा, 'हर साल सर्दियों में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) से भारत और पाकिस्तान की सेनाएं अत्यंत विषम परिस्तिथियों के कारण पीछे हट जाती हैं और सर्दियों के उपरांत पुनः अपने स्थान पर आ जाती हैं। 1998 की सर्दियों में भारतीय सेना के हटने के बाद पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी आतंकी भारतीय सीमाओं के अंदर की पर्वत चोटियों पर जा बैठे। उन ऊंचाइयों पर बैठने से दुश्मन को एक अजेय सुविधा प्राप्त हो गयी थी। नीचे से ऊपर आक्रांताओं पर हमला करती भारतीय सेना आसानी से दुश्मन के निशाने पर आ गयी थी। सेना जिन ऊंचाइयों की रक्षा करती थी, वही ऊंचाइयां उनका काल बन रही थीं।' 
 
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3 गोलियां लगने पर भी 60 फीट चढ़ाई की

परमवीर योगेंद्र सिंह यादव
वीके सिंह ने आगे लिखा, 'ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर्स का हिस्सा थे। 'घातक' कमांडो पलटन के सदस्य ग्रेनेडियर यादव को टाइगर हिल्स के अत्यधिक महत्वपूर्ण तीन दुश्मन बंकरों पर कब्जा करने का दायित्व सौंपा गया। योजना यह थी कि 18000 फीट की ऊंचाई वाले टाइगर हिल्स पर उस तरफ से चढ़ाई करनी होगी जो इतनी दुर्गम हो कि दुश्मन उस तरफ से भारतीय सैनिकों के आने की कल्पना भी न कर पाए। अगर चढ़ते हुए दुश्मन की नजर पड़ी, तो निश्चित मृत्यु।' 

वीके सिंह ने आगे लिखा, 'ग्रेनेडियर यादव ने स्वेच्छा से आगे बढ़ कर उत्तरदायित्व संभाला, जिसमें उन्हें सबसे पहले पहाड़ पर चढ़कर अपने पीछे आती टुकड़ी के लिए रस्सियों का क्रम स्थापित करना था। 3 जुलाई 1999 की अंधेरी रात में मिशन आरम्भ हुआ। कुशलता से चढ़ते हुए कमाण्डो टुकड़ी गंतव्य के निकट पहुंची ही थी कि दुश्मन ने मशीनगन, आरपीजी, और ग्रेनेड से भीषण हमला बोल दिया जिसमे भारतीय टुकड़ी के अधिकाँश सदस्य मारे गए या तितर बितर हो गए, और स्वयं यादव को तीन गोलियाँ लगीं।'

 

बेल्ट से टूटा हाथ बांधकर दुश्मन पर झपटे यादव

टाइगर हिल्स पर तिरंगा फहराती भारतीय सेना
केंद्रीय मंत्री सिंह ने लिखा, 'इस हमले से ग्रेनेडियर यादव पर यह असर हुआ कि वह एक घायल शेर की तरह पहाड़ी पर टूट पड़े। यादव ने तीन गोलियाँ लगने के बावजूद खड़ी चढ़ाई के अंतिम 60 फीट अकल्पनीय गति से पार की। ऊपर पहुँचने के बाद दुश्मन की भारी गोलाबारी ने उनका स्वागत किया। अपनी दिशा में आती गोलियों को अनदेखा कर के दुश्मन के पहले बंकर की तरफ यादव ने धावा बोल दिया। निश्चित मृत्यु को छकाते हुए बंकर में ग्रेनेड फेंक कर यादव ने आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया। अपने पीछे आती भारतीय टुकड़ी पर हमला करते दूसरे बंकर की तरफ ध्यान केन्द्रित किया। जान की परवाह न करते हुए उसी बंकर में छलांग लगा दी जहाँ मशीनगन को 4 सदस्यों का आतंकीदल चला रहा था। ग्रेनेडियर यादव ने अकेले उन सबको मौत के घाट उतार दिया। ग्रेनेडियर यादव की साथी टुकड़ी तब तक उनके पास पहुँची तो उसने पाया कि यादव का एक हाथ टूट चुका था और करीब 15 गोलियाँ लग चुकी थीं।'

वीके सिंह ने लिखा, 'ग्रेनेडियर यादव ने साथियों को तीसरे बंकर पर हमला करने के लिए ललकारा और अपनी बेल्ट से अपना टूटा हाथ बाँध कर साथियों के साथ अंतिम बंकर पर धावा बोल कर विजय प्राप्त की। विषम परिस्तिथियों में अदम्य साहस, जुझारूपन और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया।' वीके सिंह ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा, 'विजय दिवस पर ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव जैसे महावीरों को मेरा सलाम जिन्होंने कारगिल युद्ध में भारत की विजय सुनिश्चित की'
 
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वीके सिंह की फेसबुक पोस्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

- फोटो : file photo
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