नीति आयोग के एक सर्वे ने देश भर में पिछड़े जिलों की बदलती तस्वीर साफ की है। यानी आयोग द्वारा पिछड़े जिलों में विकास का पैमान नाप ये बताने की कोशिश की गई है कि देश में विकास कैसा और कितना हुआ है। विकास के एजेंडे पर बीजेपी सरकार का परीक्षण होना है, ऐसे में भारत की बदलती तस्वीर को गौर से देखा जाएगा।
टॉप पर आंध प्रदेश
प्रेरणादायक जिलों के परिवर्तन पर नीति आयोग द्वारा किए गए आधारभूत सर्वेक्षण में देश के 115 सबसे पिछड़े जिलों में आंध पद्रेश का विजयनगरम सबसे ऊपर है। विजयनगरम जिला विकास के पैमाने में 48.13 प्रतिशत के साथ टॉप पर है, छत्तीसगढ़ का राजनंदगांव जिला 47.96 प्रतिशत और महाराष्ट्र का उस्मानाबाद 47.43 प्रतिशत के साथ तीसरा जिला है। आंध्र प्रदेश का कडापा जिले को 47.43 प्रतिशत और विशाखापतनम 13वें स्थान पर है, जबकि 115 जिलों में इसे विकास के मामले में 42.66 प्रतिशत दिया गया है।
साल भर में बदली तस्वीर
पिछले साल नवंबर में पूरे देश के 680 जिलों में सरकार से उपलब्ध आंकड़ों के साथ आधारभूत सर्वेक्षण किया गया था। यह सर्वेक्षण शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, उद्योग, कृषि, बुनियादी सुविधाओं के विकास और अन्य वित्तीय संबंधित क्षेत्रों पर किया गया। इससे पहले सर्वेक्षण में देश के 115 सबसे पिछड़े जिलों की पहचान की गई।
विकास ने की कितनी तरक्की?
सर्वेक्षण के समग्र रैंकिंग में जिला कलेक्टर विवेक यादव ने कहा कि विजयनगरम ने देश के सभी 115 पिछड़े जिलों के बीच शीर्ष स्थान हासिल किया और क्षेत्रीय रैंकिंग में कृषि क्षेत्र को टॉप किया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार और जिला प्रशासन द्वारा देश में विकसित जिलों के समकक्ष विजयनगरम को स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सभी मापदंडों में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मोदी का मिशन
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2020 से पहले पहचान किए गए पिछड़े जिलों को विकसित करने के लिए केंद्र ने प्रत्येक जिले के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को विशेष अधिकारियों के रूप में नियुक्त किया और एसएमएसई के संयुक्त सचिव अनिल कुमार को विजयनगरम जिले का विशेष अधिकारी नियुक्त किया गया। जब पहली बार रैंक जारी की गई थी तो विजयनगरम 42 स्थान पर था और आज यह चार्ट में सबसे ऊपर है।