कालेधन के खिलाफ शुरू हुई नोटबंदी के बहस को भगवा परिवार ने कैशलेश समाज की ओर मोड़ दिया है। केंद्र सरकार से लेकर पूरा भगवा परिवार अब कैशलेश समाज बनाने की वकालत करने लगा है। पीएम मोदी द्वारा देश कैशलेश अर्थव्यवस्था बनाने की वकालत के बाद पीएमओ मैदान में जुटा तो भगवा परिवार के सभी संगठन भी पीएम की मुहिम के पीछे आ खड़े हुए हैं।
विश्व हिंदू परिषद् और बजरंग दल सरीखे संगठनों ने नकदी विहीन व्यवहार का स्वागत करते हुए अपने कार्यकर्ताओं को इसका प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्णय लिया है। विहिप महासचिव डा सुरेंद्र जैन ने कहा कि विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता देश के नागरिकों को इस विषय में जागरूक करेंगे और आवश्यक प्रशिक्षण भी प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल सरकार की नहीं अपितु संपूर्ण देश की है जिसमें देश की जनता ने अब भाग लेने की ठान ली है।
हालांकि संघ प्रमुख मोहन राव भागवत पहले ही यह बात कह चुके हैं कि देश कैशलेश अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने भी आम जन से ज्यादा से ज्यादा बैंकिंग तंत्र और ई-वालेट सरीखे सुविधाओं का इस्तेमाल करने का आह्वान किया है। मगर सरकार और भगवा परिवार के इस कदम को नोटबंदी पर बदली रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि नामी-गिरामी लोगों ने नोटबंदी के कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इससे कालेधन पर लगाम नहीं कसेगी। शायद यही वजह है कि भगवा परिवार ने नोटबंदी के बहस को कालेधन के बजाय कैशलेश समाज की ओर मोड़ कर अभी से भविष्य के संकटों से बचाव का रास्ता तलाशना शुरू कर दिया है।