देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक इंफोसिस के सीईओ पद से विशाल सिक्का के इस्तीफे के बाद कंपनी की अंदरूनी लड़ाई बाहर आ गई है। खबरों के मुताबिक कंपनी के पूर्व चेयरमैन और फांउडर रहे एनआर नारायणमूर्ति और विशाल सिक्का के बीच तनाव पिछले साल से ही बना हुआ था लेकिन फरवरी 2017 में यह बढ़ते-बढ़ते लोगों के सामने आ गया गया। जिसके चलते विशाल सिक्का ने पिछले सप्ताह इंफोसिस के सीईओ पद से इस्तीफा देने का फैसला किया।
फरवरी में काफी गंभीर हो गया था मामला
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में विशाल सिक्का ने कहा, ''इस साल फरवरी में यह मामला काफी गंभीर हो गया था। जानबूझकर यह विवाद काफी दुर्भावनापूर्ण और व्यक्तिगत हो गया था। वही हल्ला और वही ड्रामा। मुझे सैकड़ों घंटे बेतुके सवालों में व्यतीत करना पड़ता था। जबकि ये पहले ही तय हो चुका था कि इसमें कोई अनैतिकता नहीं थी। ''
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विशाल सिक्का ने बताया कि ''लोग सोचने लगे थे कि, यहां इंचार्ज कौन है ?क्या हमें विशाल का सौंपा हुआ काम करना चाहिए ? और ऐसे समय में कहा जाता है कि इसकी वजह से कंपनी को नुकसान हो रहा है।''
इस्तीफा देने के फैसले पर चेयरमैन का पहला रिएक्शन
सिक्का के मुताबिक पिछले दो सप्ताह में मेरे ऊपर काफी पर्सनल हमले होने लगे थे। इस्तीफे को लेकर मैंने पहले चेयरमैन के साथ और फिर बोर्ड के साथ व्यक्तिगत तौर पर और सामूहिक तौर पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब मैंने कंपनी के चेयरमैन ने मेरे इस्तीफा देने के फैसले पर पहला रिएक्शन दिया था, ''नहीं...नहीं''
एक्यजीक्यूटिव वाइस चेयरमैन का पद
आपको बता दें कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार इंफोसिस के सीईओ पद से इस्तीफे के बाद दिए बयान में विशाल सिक्का ने इसके लिए कंपनी के पूर्व चेयरमैन और फांउडर रहे एनआर नारायणमूर्ति के अनावश्यक हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि कंपनी ने सिक्का के पद का ख्याल रखते हुए उन्हें एक्यजीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया था। जबकि उनकी जगह कंपनी के सीओओ यूबी प्रवीण राव को सीईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी।
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इस्तीफा देने के बाद लिखा ई-मेल
विशाल सिक्का ने इंफोसिस के सीईओ पद से इस्तीफा देने के बाद अपने कर्मचारियों को ई-मेल लिखा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि पद पर रहते हुए उन्हें कभी भी आजादी से काम नहीं करने दिया। सिक्का ने कहा अपने तीन साल के कार्यकाल में उन पर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे, जिसकी वजह से कंपनी को उस मुकाम तक नहीं पहुंचा सका, जिसकी आशा सभी ने की थी।
काम में नारायणमूर्ति के बढ़ते हस्तक्षेप
इस्तीफे के बाद सिक्का ने तीन पेज का खत लिखते हुए कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित किया था। जिसमें उन्होंने अपने काम में नारायणमूर्ति के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर आरोप लगाया था कि इसके कारण काम करना अब मुश्किल होता जा रहा है। वहीं सिक्का के यह आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने भी इस संबंध में अपना बयान जारी कर दिया। कंपनी के को चेयरमैन आर वेंकटेशन ने कहा हमें काफी दुख के साथ उनका इस्तीफा स्वीकार करना पड़ रहा है। तो वहीं नारायणमूर्ति ने सिक्का के आरोपों के संबंध में कहा कि मैं उचित मंच और उचित वक्त पर इन बेबुनियाद आरोपों का जवाब दूंगा।