फ्रांसीसी दूतावास में वीजा धोखाधड़ी मामले में नया खुलासा हुआ है। अधिकारियों ने बताया है कि मामले से संबंधित हाई रिस्क वाले 64 व्यक्तियों की वीजा फाइलों को दूतावास से ही गायब कर दिया गया है। आरोप है कि दूतावास के पूर्व अधिकारी शुभम शौकीन और आरती मंडल ने संदिग्ध उम्मीदवारों की फाइलों को मंजूरी देकर कथित तौर पर प्रति वीजा 50,000 रुपये के हिसाब से 32 लाख रुपये की वूसली की थी। अधिकारियों ने बताया, जांच एजेंसी को शक है कि मंडल और शौकीन ने वीजा विभाग के दस्तावेजों और फाइलों को कथित रूप से नष्ट कर दिया, जिससे धोखाधड़ी से संबंधित कोई सबूत न रहे।
दरअसल, हाल ही में फ्रांसीसी दूतावास में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वीजा देने का मामला सामने आया था। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को फ्रांस दूतावास के वीजा विभाग के दो कर्मचारियों सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। आरोपियों की पहचान शुभम शौकीन, आरती मंडल, नवजोत सिंह, चेतन शर्मा, सतविंदर सिंह पुरेवाल, मनप्रीत सिंह व अन्य के रूप में हुई है। शुभम और आरती नई दिल्ली में फ्रांस दूतावास के वीजा विभाग में काम करते थे।
पांच महीनों में किया 32 लाख का खेल
दरअसल, यह पूरा मामला जनवरी से मई के बीच का है। आरोप है कि शुभम शौकीन और आरती मंडल ने एक जनवरी से छह मई के बीच 484 वीजा से संबंधित फाइलों का काम देखा था, जिनमें से 64 फाइलें प्रवासन के उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों से संबंधित थीं। इसमें युवा किसान या पंजाब के बेरोजगार जैसे व्यक्ति शामिल थे, जिन्होंने पहले कभी यात्रा नहीं की थी और उनके पास शेंगेन वीजा रखने की प्रोफाइल नहीं थी।
कई ठिकानों पर हो चुकी है छापेमारी
इससे पहले सीबीआई ने इसी मामले में शुक्रवार को पंजाब, दिल्ली व जम्मू कश्मीर में छापेमारी की थी। इस दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन और संदिग्ध पासपोर्ट आदि जैसे दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए थे। सीबीआई का आरोप है कि तीन अन्य आरोपी - जम्मू-कश्मीर के नवजोत सिंह और पंजाब के चेतन शर्मा और सतविंदर सिंह पुरेवाल, तीनों ने कथित तौर पर मार्सक फ्लीट मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा लिखे गए नकली और जाली पत्र जमा किए थे।