मशहूर वायरोलॉजिस्ट टी जैकब जॉन ने दावा किया कि भारत में कोविड महामारी असल में स्थानिक बीमारी (एंडेमिक) बनने की तरफ बढ़ रही है। जब किसी समुदाय में संक्रमण के मामलों को ग्राफ पर देखा जाता है, तो मामले बढ़ने, चरम पर पहुंचने और कम होने की प्रक्रिया को महामारी कहा जाता है। वहीं मामलों की संख्या की स्थिर अवस्था को स्थानिक व स्थानीय बीमारी कहा जाता है।
बाद में जब कभी भी महामारी की स्थिति बनती है, तो इसे लहर माना जाता है। हालांकि, जब तक मामलों की संख्या चार सप्ताह तक मामूली उतार-चढ़ाव के साथ कम और स्थिर नहीं बनी रहती, तब तक एंडेमिक घोषित नहीं कर सकते।
आती रह सकती हैं छोटी-छोटी लहरें
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सेंटर ऑफ एडवांस्ड रिसर्च इन वायरोलॉजी के पूर्व निदेशक टी जैकब जॉन ने कहा, देश में एंडेमिक का दौर कई महीनों बना रहेगा। ओमिक्रॉन की तरह कोई नया वैरिएंट भी आ सकता है। हालांकि, इसकी संभावना बहुत कम है कि ओमिक्रॉन से अधिक संक्रामक और डेल्टा से अधिक खतरनाक कोई और स्वरूप सामने आएगा। छोटी-छोटी कोविड लहरें आती रह सकती हैं।
लोगों को रहन-सहन के तरीके में तब्दीली की जरूरत
महामारी विशेषज्ञ और फाउंडेशन फॉर पीपल-सेट्रिक हेल्थ सिस्टमस, दिल्ली के कार्यकारी निदेशक डॉ. चंद्रकांत लहरिया ने कहा कि भारत एंडेमिक चरण में प्रवेश कर रहा है या नहीं, इसकी प्रासंगिकता नहीं है। ध्यान यह रखना है कि लोग संक्रमण के प्रति संवेदनशील हो और अपने जीने और रहन-सहन के तरीकों में तब्दीली करें।
16 राज्यों के 80 जिलों में संक्रमण अब भी गंभीर, 105 जिले ऑरेंज जोन में
नई दिल्ली। कोरोना मामलों में गिरावट के बीच अभी भी 16 राज्यों के 80 जिलों में संक्रमण गंभीर बना हुआ है। वहीं देश के 105 जिले ऑरेंज जोन में है जहां साप्ताहिक संक्रमण दर पांच से 10 फीसदी के बीच है। असम, गोवा और गुजरात में एक-एक जिला रेड जोन में है। जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पूरी तरह से ग्रीन जोन में आ गई है।
76 दिन में सबसे कम मरीज
76 दिन बाद देश में सबसे कम 27,409 नए कोरोना मरीज मिले हैं। दैनिक संक्रमितों की संख्या में भी 93 फीसदी की गिरावट आई है।
जगन्नाथ मंदिर में टीका सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं: ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश को 21 फरवरी से कोविड टीके का सर्टिफिकेट जरूरी नहीं।