विमान सेवाओं को सुरक्षित बनाने के लिए कई तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है। ये नियम नागर विमानन महानिदेशालय द्वारा तैयार किए गए हैं। जिनके लिए ये नियम बने हैं, उनमें पायलट, सहकर्मी और ग्राउंड स्टाफ शामिल है।
अगर उल्लंघनों का आंकड़ा देखें तो उड़ान दल के सदस्यों, विमान की टेक्सिंग प्रक्रिया में शामिल कर्मी और विमान अनुरक्षण कार्मिकों ने कई बार नियमों का उल्लंघन किया है। 2017 में 254, 2018 में 256 और पिछले साल 244 उल्लंघन सामने आए हैं।
इसके अलावा विमान यातायात नियंत्रकों, फ्लाइट डिस्पैचरों, विमान अनुरक्षण कार्मिकों, एयरड्रोम प्रचालन कर्मियों, अग्निशमन एवं बचाव कर्मियों, वाहन चालकों, ईंधन भरने वाले वाहन और ग्राउंड हैंडलिंग कार्मिक आदि के द्वारा जो उल्लंघन हुए हैं, उनकी संख्या गत वर्ष 97 थी, जबकि इस साल फरवरी तक 81 उल्लंघन सामने आए हैं।यहां उल्लंघन से मतलब 13 तरह के मन:प्रभावी पदार्थों का सेवन है।
भारत सरकार के नागर विमानन मंत्रालय के अनुसार, यह माना जाता है कि ड्यूटी के दौरान पायलट और ग्राउंड स्टाफ सभी तरह के नियमों का पालन करें। इसके लिए उन्हें समय समय पर कड़ी हिदायतें भी जारी की जाती हैं। मकसद यह होता है कि किसी भी कर्मी की छोटी सी गलती के कारण विमान सेवा का सुरक्षित घेरा न टूटने पाए।इसके लिए सभी कर्मियों को ड्यूटी के वक्त नशे और उससे जुड़े दूसरे पदार्थों से दूर रखा जाता है।
इसके लिए नियमित जांच होती है।यदि उड़ान दल और हवाई यातायात नियंत्रकों की जांच पड़ताल में कुछ गलत पाया जाता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। स्क्रीनिंग जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी को तुरंत ड्यूटी से हटा दिया जाता है। जब तक कर्मी की रिपोर्ट की पूर्ण पुष्टि नहीं होती, तब तक उसे ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने देते।
रिपोर्ट की पुष्टि होने पर संबंधित कर्मी को व्यसनमुक्ति और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है। उसे तभी ड्यूटी पर बुलाया जाएगा, जब उसकी दोबारा से टेस्ट रिपोर्ट नेगेटिव आई हो। साथ ही ऐसे कर्मियों को मनोचिकित्सक से भी स्पष्टीकरण लाना होगा। इसके बाद संगठन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से भी इजाजत लेनी पड़ेगी।
यदि कोई व्यक्ति जांच में पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी सुरक्षा संवेदी ड्यूटी पर वापस आता है तो उसकी जांच कराई जाएगी।वह पुन:पुष्टिकरण जांच में भी पॉजिटिव मिलता है तो ऐसे व्यक्ति का लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है।