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ग्रामीणों ने खेत और घर किए सेना के हवाले, कहा- देश के लिए सबकुछ न्यौछावर

Sun, 02 Oct 2016 03:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जयपुर
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- फोटो : PTI
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पश्चिमी सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव से उपजी संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों के हौसले बुलंद हैं। सीमा से सटे गांव के लोग अपना सब कुछ सेना के हवाले करने को तैयार हैं। यही नहीं सेना से कह भी रहे हैं कि हम आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। किसी ने अपना घर सेना के हवाले कर दिया है तो किसी ने अपना खेत।
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हां, बच्चों को जरूर अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है, लेकिन खुद सेना के साथ डटे हुए हैं। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों में वंदेमातरम के जयघोष गुंजायमान हो रहे हैं। सभी ग्रामीण अपने मुल्क के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हैं।

राजस्थान में जबरदस्त खेती के लिए जाना जाने वाला श्रीगंगानगर जिला भारत-पाक सीमा से सटा हुआ है। सीमा से सटी ग्राम पंचायतों संगराणा, लखाहाकम, 43 पीएस, 75 एनपी व 22 पीटीडी के 16 गांव ऐसे हैं, जो सीमा के निकट हैं। चाहरांवाली ढाणी निवासी आत्माराम महिया व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव के युवा पूरे उत्साह के साथ सेना का सहयोग कर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में खेती लहलहा रही है, फिर भी किसानों ने सुरक्षा के लिए माइंस बिछाने को खेतों को सेना के हवाले कर दिया है। 
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यही नहीं, ग्रामीणों ने सेना को मोर्चा बनाने के लिए अपने घर तक सौंप दिए हैं। यहां सेना ग्रामीणों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रही है, लेकिन डरने के बजाय ग्रामीण जयकारे लगा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर खुद को आजमाने की गुजारिश कर रहे हैं। बाड़मेर और जैसलमेर सीमा से सटे गांवों के बच्चों तक में डर नजर नहीं आ रहा है। बच्चे तक सेना व बीएसएफ की गतिविधियों को देखकर जवानों व अफसरों को सैल्यूट कर रहे हैं। 
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सीमा पर की नवरात्र की पूजा

- फोटो : PTI
सीमा के नजदीक सेहलाऊ मदरसे में पढ़ने वाले परवेज ने बताया कि घर, परिवार और समाज सभी सेना के साथ हैं। हम सभी सेना के साथ खड़े होकर पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना चाहते हैं। उसने कहा कि हम भले ही बॉर्डर के पास बैठे हैं, लेकिन खौफ जैसा कोई माहौल नहीं है। यहां ग्रामीण पुरानी यादें ताजा करते हुए बताते हैं कि कारगिल के वक्त भी यहां के लोगों ने सेना को बंकर बनाने के लिए अपना घर दे दिया था।

जैसलमेर में सीमा पर स्थित प्रख्यात तनोट माता मंदिर में सुरक्षा एजेंसियों ने विधि-विधान के साथ नवरात्र की पूजा की। बीएसएफ जवानों ने पूजा-अर्चना की और बाद में शुभ अवसर पर दर्शन करने का दौर शुरू हो गया। इससे पहले जवानों ने तनोट माता मंदिर को सजाया और अन्य तैयारियां की। यहां बीएसएफ ने नवरात्र मेले पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। 

गौरतलब है कि इस मंदिर में पूजा-अर्चना बीएसएफ के जवान ही करते हैं। इस मंदिर में 1965 व 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की ओर से गिराए गए बमों में से एक भी बम नहीं फटा था। ये बम आज भी यहां सुरक्षित रखे गए हैं। सभी का मानना है कि सरहद पर माता सबकी रक्षा कर रही हैं।
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