पश्चिमी सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव से उपजी संवेदनशील परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों के हौसले बुलंद हैं। सीमा से सटे गांव के लोग अपना सब कुछ सेना के हवाले करने को तैयार हैं। यही नहीं सेना से कह भी रहे हैं कि हम आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। किसी ने अपना घर सेना के हवाले कर दिया है तो किसी ने अपना खेत।
हां, बच्चों को जरूर अपने रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है, लेकिन खुद सेना के साथ डटे हुए हैं। श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जिलों के सीमावर्ती गांवों में वंदेमातरम के जयघोष गुंजायमान हो रहे हैं। सभी ग्रामीण अपने मुल्क के लिए सब कुछ कुर्बान करने को तैयार हैं।
राजस्थान में जबरदस्त खेती के लिए जाना जाने वाला श्रीगंगानगर जिला भारत-पाक सीमा से सटा हुआ है। सीमा से सटी ग्राम पंचायतों संगराणा, लखाहाकम, 43 पीएस, 75 एनपी व 22 पीटीडी के 16 गांव ऐसे हैं, जो सीमा के निकट हैं। चाहरांवाली ढाणी निवासी आत्माराम महिया व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव के युवा पूरे उत्साह के साथ सेना का सहयोग कर रहे हैं। सीमावर्ती गांवों में खेती लहलहा रही है, फिर भी किसानों ने सुरक्षा के लिए माइंस बिछाने को खेतों को सेना के हवाले कर दिया है।
यही नहीं, ग्रामीणों ने सेना को मोर्चा बनाने के लिए अपने घर तक सौंप दिए हैं। यहां सेना ग्रामीणों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दे रही है, लेकिन डरने के बजाय ग्रामीण जयकारे लगा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर खुद को आजमाने की गुजारिश कर रहे हैं। बाड़मेर और जैसलमेर सीमा से सटे गांवों के बच्चों तक में डर नजर नहीं आ रहा है। बच्चे तक सेना व बीएसएफ की गतिविधियों को देखकर जवानों व अफसरों को सैल्यूट कर रहे हैं।