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विक्रम को मिली जान से मारने की धमकी: PM मोदी को झालमुड़ी खिलाने वाले दुकानदार को मिली सुरक्षा, CRPF जवान तैनात

Sat, 23 May 2026 12:47 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी परोसने वाले विक्रम शॉ ने जान से मारने और बम से उड़ाने की धमकियां मिलने का दावा किया है। शिकायत के बाद उनकी सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ जवान तैनात किए गए हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुकानदार विक्रम शॉ - फोटो : एक्स/नरेंद्र मोदी/वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार के दौरान झालमुड़ी परोसने वाले विक्रम शॉ ने शनिवार को दावा किया कि उन्हें जान से मारने और बम से उड़ाने की धमकियां मिली हैं। उन्होंने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है, जिसके बाद उनकी सुरक्षा के लिए सीआरपीएफ जवान तैनात किए गए।
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विक्रम ने क्या बताया?

एएनआई से बातचीत में विक्रम शॉ ने कहा कि उन्हें एक धमकी भरा फोन कॉल आया था। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी पुलिस थाने में दे दी गई है और सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें सुरक्षा दी गई है। उन्होंने कहा कि मैंने पुलिस स्टेशन में इसकी शिकायत कर दी है। मुझे धमकी भरा कॉल आया था। सुरक्षा के लिए मुझे सुरक्षा दी गई है।

बताया जा रहा है कि विक्रम शॉ को व्हाट्सऐप के जरिए भी धमकी भरे संदेश मिले थे। ये कथित धमकियां उस समय सामने आईं जब अप्रैल में झारग्राम में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रैली के दौरान उन्होंने पीएम को झालमुड़ी परोसी थी।

दिलीप घोष ने दी प्रतिक्रिया

इस बीच, पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस तरह की घटनाओं के जरिए देश में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं और अब ऐसे लोगों को करारा जवाब मिलेगा।
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पत्रकारों से बातचीत में दिलीप घोष ने कहा कि कुछ लोग भारत में इस तरह की हरकतें करके तनाव पैदा करते हैं। अब वह समय चला गया है। अब हमारी सरकार है। हर चीज का जवाब अच्छे से दिया जाएगा।

वहीं, मंगलवार को दिलीप घोष ने ममता बनर्जी द्वारा बुलडोजर कल्चर के खिलाफ पार्टी विधायकों के साथ बुलाई गई बैठक को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी बैठकें पहले की गई होतीं और लोगों की परेशानियों को समझा गया होता, तो हालात कुछ अलग होते। उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री को यह तक पता नहीं था कि बंगाल में क्या हो रहा है। अगर ये बैठकें पहले होतीं और लोगों की पीड़ा को समझा जाता, तो स्थिति कुछ और होती।
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