दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने में जैन धर्म ने अग्रणी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिस तरह के माहौल से गुजर रही है, उसमें जैन धर्म की शिक्षाएं कहीं ज्यादा प्रासंगिक हो गई हैं और इन शिक्षाओं को अपनाकर ही दुनिया में शांति स्थापित की जा सकती है। विश्व शांति केंद्र में अहिंसा विश्व भारती संस्था द्वारा आयोजित “विश्व शांति सद्भावना और पीस एजुकेशन” विषय पर लोगों को संबोधित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने ये बातें कहीं।
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध जैन मुनि आचार्य लोकेश ने कहा कि युद्ध व हिंसा से जूझ रहे विश्व को शांति शिक्षा की जानकारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शांति शिक्षा' पाठ्यक्रम प्राचीन योग और वर्तमान वैज्ञानिक अनुसंधान का एक संयोजन है जिसे विभिन्न विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में लागू किया जाएगा। शांति शिक्षा का विषय मनुष्यों में पाशविक प्रवृत्ति को समाप्त करने और मानवीय एवं आध्यात्मिक मूल्यों को जागृत करने का कार्य करता है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत का इतिहास शांति और अहिंसा का इतिहास है। उन्होंने कहा कि आचार्य लोकेश मुनि विश्वशांति केंद्र के माध्यम से शांति, अहिंसा व सद्भावना का संदेश देश दुनिया मे फैला रहे हैं, यह हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा भगवान महावीर की अहिंसा और करुणा ही विश्व शांति का आधार है।
दिल्ली सरकार के सांस्कृतिक मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि भगवान महावीर ने कहा था ‘अहिंसा परमों धर्म:’। भगवान महावीर ने अहिंसा और करुणा का संदेश दिया। भगवान बुद्ध करुणा और मैत्री का संदेश देकर पूरे एशिया को ‘शांति क्षेत्र’ के रूप मे देखने का सपना देखा। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ अनुराग मैराल ने कहा कि यूनेस्को भी कहता है कि "युद्ध मनुष्यों के मन में शुरू होते हैं, इसलिए शांति का निर्माण भी मनुष्यों के मन में ही होना चाहिए"। इसी बात को आधार बनाते हुए विश्व शांति केंद्र और स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी विभिन्न देशों के बीच शांति व सद्भावना के लिए कार्य करेंगे। निर्मल कुमार मिंडा ने कहा कि भारत के प्रथम विश्व शांति केंद्र की स्थापना आचार्यश्री लोकेश मुनि के नेतृत्व में गुरुग्राम में हुई है, यह हमारे लिए गौरव का विषय है।